{"_id":"5dd44eb78ebc3e547f59270b","slug":"ignorence-chandigarh-news-pkl3573861163","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मरीज से मजाकः टीबी की बीमारी को बता दिया चौथे स्टेज का कैंसर, प्राइवेट हेल्थ सेंटर पर जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीज से मजाकः टीबी की बीमारी को बता दिया चौथे स्टेज का कैंसर, प्राइवेट हेल्थ सेंटर पर जुर्माना
Wed, 20 Nov 2019 01:24 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2019 01:24 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक प्राइवेट हेल्थ सेंटर ने ट्यूबरक्लॉसिस (टीबी) के मरीज को चौथे स्टेज का कैंसर का मरीज बना दिया। वह बुरी तरीके से डर गया। सेंटर के डॉक्टरों के कहने पर तीन बार मरीज की कीमोथैरिपी भी करा दी गई। राहत नहीं मिली तो मरीज ने मुंबई के एक अस्पताल में इलाज कराया। रिपोर्ट आई तो पता चला कि मरीज को कैंसर था ही नहीं, उसे तो ट्यूबरक्लॉसिस (टीबी) था। नौ महीने की सामान्य दवाई के बाद वह ठीक भी हो गया।
सेक्टर-22बी में रहने वाले विजय रमोला ने सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और सेक्टर-44सी स्थित स्पाइरल सीटी और एमआरआई सेंटर के खिलाफ वर्ष 2017 में उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी। विजय रमोला चंडीगढ़ स्थित बैंक ऑफ पटियाला के मैनेजर रह चुके थे। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि वर्ष 2014 में करीब 15 दिनों तक उन्हें खांसी की समस्या आई।
इसकी वजह से वह जीएमसीएच-32 गए। डॉक्टरों ने उन्हें छाती का सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। रिपोर्ट में शिकायतकर्ता के फेफड़ों में लिम्फ नोड्स की असामान्य वृद्धि पाई गई। इसके बाद पल्मनरी सेक्शन में ट्यूबरक्लॉसिस का पता लगाने के लिए टेस्ट कराए गए। सब कुछ सामान्य पाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने शिकायतकर्ता को लिम्फ नोड्स के बारे में ब्रोन्कोस्कोपी परीक्षण कराने की सलाह दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
सेक्टर-22बी में रहने वाले विजय रमोला ने सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और सेक्टर-44सी स्थित स्पाइरल सीटी और एमआरआई सेंटर के खिलाफ वर्ष 2017 में उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी। विजय रमोला चंडीगढ़ स्थित बैंक ऑफ पटियाला के मैनेजर रह चुके थे। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि वर्ष 2014 में करीब 15 दिनों तक उन्हें खांसी की समस्या आई।
विज्ञापन
इसकी वजह से वह जीएमसीएच-32 गए। डॉक्टरों ने उन्हें छाती का सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। रिपोर्ट में शिकायतकर्ता के फेफड़ों में लिम्फ नोड्स की असामान्य वृद्धि पाई गई। इसके बाद पल्मनरी सेक्शन में ट्यूबरक्लॉसिस का पता लगाने के लिए टेस्ट कराए गए। सब कुछ सामान्य पाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने शिकायतकर्ता को लिम्फ नोड्स के बारे में ब्रोन्कोस्कोपी परीक्षण कराने की सलाह दी गई।
विज्ञापन
कुछ अन्य परीक्षण के बाद जीएमसीएच-32 के डॉक्टरों ने शिकायतकर्ता को पीईटी टेस्ट कराने की सलाह दी। इसके लिए शिकायतकर्ता सेक्टर-44सी स्थित स्पाइरल सीटी और एमआरआई सेंटर गए। टेस्ट के बाद सेंटर ने रिपोर्ट में कहा कि शिकायतकर्ता को चौथे स्टेज का फेफड़े का कैंसर है। इसके बाद कीमोथैरेपी कराने की सलाह दी।
2 जनवरी, 31 जनवरी और 23 फरवरी 2015 को तीन बार कीमोथैरेपी भी कराई गई, लेकिन शिकायतकर्ता को कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल गए। वहां कई तरह के टेस्ट लिए गए, लेकिन मरीज में चौथे स्टेज का फेफड़े का कैंसर नहीं मिला। इसके बाद शिकायतकर्ता का बायोप्सी परीक्षण किया गया और रिपोर्ट के बाद यह ट्यूबरक्लॉसिस रोग का मामला पाया गया। 9 महीने तक दवाइयां चलीं और उसके बाद वह बिल्कुल ठीक हो गए।
मरीज में मौत का डर भर दिया : फोरम
उपभोक्ता फोरम ने अपने आदेश में कहा कि हेल्थ सेंटर ने मरीज को ऐसा एहसास कराया कि अब उसे दुनिया को अलविदा कह देने का समय आ गया है। उसके अंदर मौत का डर भर दिया। स्पाइरल सीटी और एमआरआई सेंटर ने अपने जवाब में कहा कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती है। हालांकि, फोरम ने इस दलील को नहीं माना और दोषी करार दिया। वहीं, फोरम ने पाया कि जीएमसीएच-32 की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई, इसलिए दायर याचिका को खारिज कर दिया।
फोरम ने स्पाइरल सीटी और एमआरआई सेंटर को शिकायतकर्ता को 2 लाख रुपये मुआवजा के रूप में देने के आदेश दिए। इसके साथ ही मुकदमे के खर्च के एवज में भी 15 हजार रुपये अदा करने को कहा है। इन आदेशों की पालना 30 दिन के अंदर करनी होगी नहीं तो शिकायतकर्ता को 12 प्रतिशत ब्याज भी देना पड़ेगा।
2 जनवरी, 31 जनवरी और 23 फरवरी 2015 को तीन बार कीमोथैरेपी भी कराई गई, लेकिन शिकायतकर्ता को कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल गए। वहां कई तरह के टेस्ट लिए गए, लेकिन मरीज में चौथे स्टेज का फेफड़े का कैंसर नहीं मिला। इसके बाद शिकायतकर्ता का बायोप्सी परीक्षण किया गया और रिपोर्ट के बाद यह ट्यूबरक्लॉसिस रोग का मामला पाया गया। 9 महीने तक दवाइयां चलीं और उसके बाद वह बिल्कुल ठीक हो गए।
मरीज में मौत का डर भर दिया : फोरम
उपभोक्ता फोरम ने अपने आदेश में कहा कि हेल्थ सेंटर ने मरीज को ऐसा एहसास कराया कि अब उसे दुनिया को अलविदा कह देने का समय आ गया है। उसके अंदर मौत का डर भर दिया। स्पाइरल सीटी और एमआरआई सेंटर ने अपने जवाब में कहा कि उन्होंने सेवा में कोई कोताही नहीं बरती है। हालांकि, फोरम ने इस दलील को नहीं माना और दोषी करार दिया। वहीं, फोरम ने पाया कि जीएमसीएच-32 की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई, इसलिए दायर याचिका को खारिज कर दिया।
फोरम ने स्पाइरल सीटी और एमआरआई सेंटर को शिकायतकर्ता को 2 लाख रुपये मुआवजा के रूप में देने के आदेश दिए। इसके साथ ही मुकदमे के खर्च के एवज में भी 15 हजार रुपये अदा करने को कहा है। इन आदेशों की पालना 30 दिन के अंदर करनी होगी नहीं तो शिकायतकर्ता को 12 प्रतिशत ब्याज भी देना पड़ेगा।