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डॉक्टरों की टीम का जज्बा- डर जाते तो अपनी ताकत का अंदाजा नहीं होता, कोरोना को हराकर रहेंगे
Tue, 09 Jun 2020 01:32 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2020 01:32 PM IST
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कोरोना कमांडो डॉक्टरों की टीम
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी का नाम सुनते ही मन में खौफ भर जाता है। ऐसी स्थिति में जब हम उन मरीजों से दूर रहने के लिए खुद अस्पताल जाने से कतराते हैं, तब उनकी देखभाल और इलाज करने के लिए कुछ जांबाज 24 घंटे अस्पताल में ड्यूटी दे रहे होते हैं। ऐसे ही जांबाज योद्धा हैं पीजीआई कोविड-आईसीयू में तैनात नाइट शिफ्ट की टीम में शामिल डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ। जो अपनी जान की परवाह किए बिना रात को दिन समझ कर आईसीयू में भर्ती मरीजों की देखभाल में जुटे हैं।
टीम में शामिल नर्सिंग ऑफिसर धीराराम, परविंदर कौर, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अवनीत, जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर जीजो और टेक्निकल स्टाफ सविता, जिनके लिए इस महामारी में फर्ज से बढ़कर कुछ भी नहीं। यह पांचों कोरोना महामारी से जंग में इस कदर जुटे हैं कि इन्हें न तो अपनी फिक्र है और न ही अपने परिवार की। इनका कहना है कि एक बार कोरोना पर जीत दर्ज हो जाए फिर अपने लिए और अपने परिवार के लिए पूरा समय बचा हुआ है। फिलहाल यह समय शहर और देश को कोरोना से बचने का है।
मरीज को खाना भी खिलाया
धीराराम ने बताया कि कोरोना महामारी में मरीजों से संपर्क बेहद खतरनाक होता है लेकिन हम ड्यूटी के दौरान पॉजिटिव मरीजों को खाना भी खिलाते हैं। आईसीयू में भर्ती मरीज की स्थिति बेहद गंभीर होती है इसलिए उनके संपर्क में आए बिना कोई भी काम करना संभव नहीं होता लेकिन उस दौरान हम अपनी सुरक्षा की अनदेखी नहीं करते। पीपीई किट पहनने के साथ ही अन्य सावधानियों का पूरी तरह पालन करते हैं ताकि ड्यूटी के दौरान हम खुद संक्रमण के शिकार न हों।
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टीम में शामिल नर्सिंग ऑफिसर धीराराम, परविंदर कौर, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अवनीत, जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर जीजो और टेक्निकल स्टाफ सविता, जिनके लिए इस महामारी में फर्ज से बढ़कर कुछ भी नहीं। यह पांचों कोरोना महामारी से जंग में इस कदर जुटे हैं कि इन्हें न तो अपनी फिक्र है और न ही अपने परिवार की। इनका कहना है कि एक बार कोरोना पर जीत दर्ज हो जाए फिर अपने लिए और अपने परिवार के लिए पूरा समय बचा हुआ है। फिलहाल यह समय शहर और देश को कोरोना से बचने का है।
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मरीज को खाना भी खिलाया
धीराराम ने बताया कि कोरोना महामारी में मरीजों से संपर्क बेहद खतरनाक होता है लेकिन हम ड्यूटी के दौरान पॉजिटिव मरीजों को खाना भी खिलाते हैं। आईसीयू में भर्ती मरीज की स्थिति बेहद गंभीर होती है इसलिए उनके संपर्क में आए बिना कोई भी काम करना संभव नहीं होता लेकिन उस दौरान हम अपनी सुरक्षा की अनदेखी नहीं करते। पीपीई किट पहनने के साथ ही अन्य सावधानियों का पूरी तरह पालन करते हैं ताकि ड्यूटी के दौरान हम खुद संक्रमण के शिकार न हों।
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आधी रात तक खड़े-खड़े की ड्यूटी
टीम की टेक्निकल स्टाफ सविता ने नाइट ड्यूटी के अनुभव को साझा किया और बताया कि रात 8 बजे से 2 बजे तक लगातार एक-एक मिनट सजग रहना पड़ता है। आईसीयू में गंभीर मरीजों के भर्ती होने के कारण हमारी जरा सी अनदेखी उनके लिए घातक साबित हो सकती है। इस बात को ठीक से समझते हुए हम पांचों पूरी तरह अपने मरीजों पर फोकस करते हैं। पीपीई किट पहनने के कारण न तो हम पानी पी सकते हैं नहीं अपना कोई अन्य काम कर सकते हैं। हमें खड़े-खड़े 6 से 7 घंटे लगातार ड्यूटी करनी होती है। लेकिन उन मरीजों के बीच अपनी ड्यूटी के दौरान हमें न तो कभी कोई परेशानी महसूस होती है न ही हम थकते हैं क्योंकि हम पर कोरोना को शिकस्त देने का जुनून हावी है।
मजबूती मिली अपनी टीम से
वहीं टीम में शामिल सीनियर डॉक्टर अवनीत और जूनियर डॉक्टर जीजो ने बताया कि आईसीयू में ड्यूटी के दौरान हम पांच लोगों की पक्की यारी हो गई है। कल तक हम सिर्फ ड्यूटी के समय एक दूसरे से मिलते थे लेकिन महामारी के इस दौर में हमने अपनी एकजुटता और सहयोग से एक दूसरे को ताकत दिया। परिवार से दूर रहकर भी हमें अपनी टीम से प्यार और अपनेपन का अहसास मिला। सच कहा जाए तो हम पांचों ने एक दूसरे को ड्यूटी के दौरान कभी किसी तरह की परेशानी होने ही नहीं दी।
जागरूक बनिए सुरक्षित रहिए
पीजीआई कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में तैनात युवा टीम का कहना है कि कोरोना जैसी घातक बीमारी से बचना है तो जागरूक और सचेत रहना होगा। बचाव के मानकों का सावधानी से पालन करते हुए खुद को और अपने परिवार को कोरोना से बचाना होगा। उनका कहना है कि जब वह अस्पताल में संक्रमित मरीजों के बीच रहकर सावधानी बरतते हुए सुरक्षित रह सकते हैं तो फिर मरीजों से दूर रहकर आप अपनी सूझबूझ के बल पर खुद की सुरक्षा बड़ी आसानी से कर सकते हैं।
मजबूती मिली अपनी टीम से
वहीं टीम में शामिल सीनियर डॉक्टर अवनीत और जूनियर डॉक्टर जीजो ने बताया कि आईसीयू में ड्यूटी के दौरान हम पांच लोगों की पक्की यारी हो गई है। कल तक हम सिर्फ ड्यूटी के समय एक दूसरे से मिलते थे लेकिन महामारी के इस दौर में हमने अपनी एकजुटता और सहयोग से एक दूसरे को ताकत दिया। परिवार से दूर रहकर भी हमें अपनी टीम से प्यार और अपनेपन का अहसास मिला। सच कहा जाए तो हम पांचों ने एक दूसरे को ड्यूटी के दौरान कभी किसी तरह की परेशानी होने ही नहीं दी।
जागरूक बनिए सुरक्षित रहिए
पीजीआई कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में तैनात युवा टीम का कहना है कि कोरोना जैसी घातक बीमारी से बचना है तो जागरूक और सचेत रहना होगा। बचाव के मानकों का सावधानी से पालन करते हुए खुद को और अपने परिवार को कोरोना से बचाना होगा। उनका कहना है कि जब वह अस्पताल में संक्रमित मरीजों के बीच रहकर सावधानी बरतते हुए सुरक्षित रह सकते हैं तो फिर मरीजों से दूर रहकर आप अपनी सूझबूझ के बल पर खुद की सुरक्षा बड़ी आसानी से कर सकते हैं।