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सभी केंद्र: केंद्र उचित कदम उठाए तो निकाला जा सकता है समाधान : हाईकोर्ट

Thu, 24 Oct 2024 07:59 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2024 07:59 PM IST
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If the Center takes appropriate steps, a solution can be found: High Court
पंजाब में धान की खरीद न होने पर केंद्र, पंजाब और एफसीआई को नोटिस जारी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। धान की खरीद न होने और भंडारों में पहले का स्टॉक मौजूद होने के चलते स्थान न होने को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र व पंजाब सरकार सहित एफसीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि केंद्र उचित कदम उठाए तो इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
एडवोकेट सनप्रीत सिंह ने याचिका में बताया कि पंजाब सरकार ने अब तक धान की खरीद शुरू नहीं की है। अगर फसल की खरीद समय पर नहीं की जाती है तो किसानों को समय पर उनकी फसल का भुगतान नहीं मिलेगा। ऐसा हुआ तो फसल के लिए औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों से लिए गए ऋण की अदायगी में देरी होगी। ऐसा होने पर उन्हें नई फसल के लिए नकद ऋण मिलने में और देरी होगी। इस देरी से किसानों पर अतिरिक्त ब्याज दर का बोझ पड़ेगा, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
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याचिका में यह भी कहा गया कि अगर पंजाब में धान की खरीद में देरी होती है तो अगली फसल यानी गेहूं की बुवाई में भी देरी होगी। बीज बोने की तारीख 01 नवंबर तय की गई है और इसलिए किसानों के पास अगली बुवाई के लिए अपने खेत तैयार करने के लिए बहुत कम समय है। ऐसा हुआ तो किसानों के पास पराली जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा, जिसका पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। याची ने कहा कि एफसीआई के गोदामों में भंडारण स्थान की कमी और मंडियों में नए धान की आवक ने राज्य में संकट को बढ़ा दिया है।
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पंजाब ने बताईं दो समस्याएं, केंद्र 29 को देगा जवाब
वीरवार को याचिका के जवाब में पंजाब सरकार ने कहा कि उन्हें मुख्य रूप से दो मुश्किलें आ रही हैं। पहली तो स्टोरेज की है और दूसरी फसल की किस्म को लेकर आ रही है। पीआर 126 किस्म से पहले प्रति क्विंटल 67 प्रतिशत फसल मिल जाती थी, लेकिन अब 62 से 64 प्रतिशत मिल रही है। अगर केंद्र सरकार इनके दोनों मुद्दे हल कर दे तो पूरी समस्या का हल निकल जाएगा। चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ ने पंजाब की ओर से दी गई इस जानकारी पर केंद्र सरकार को 29 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने के आदेश दे दिया है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि बड़ी हैरत की बात है कि जब पंजाब में भूमिगत पानी का स्तर लगातार गिर रहा है तो यहां चावल कैसे लगाए जा रहे हैं। इस पर एडवोकेट जनरल ने कहा कि सरकार मानसून शुरू होने पर ही बिजाई की इजाजत देती है।
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