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Chandigarh News: जेजे एक्ट का पालन होता तो न जाती 17 साल के छात्र की जान

Fri, 16 May 2025 02:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 May 2025 02:08 AM IST
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If JJ Act was followed then the life of 17 year old student would not have been lost
चंडीगढ़। मार्च में चंडीगढ़ के एक निजी स्कूल के 17 साल के छात्र की आत्महत्या के मामले का हवाला देते हुए जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट के प्रावधानों का पालन भविष्य में सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।
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याची ने कहा कि यदि एक्ट के प्रावधानों का पालन होता तो 17 साल का किशोर छात्र आत्महत्या नहीं करता। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार व यूटी प्रशासन के गृह सचिवों, पंजाब, यूटी और नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी एडवोकेट कुंवर पाहुल सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि मार्च में जीरकपुर के रहने वाले छात्र को सेक्टर-17 साइबर सेल थाने में बुलाया गया था। वहां जाकर पता चला कि छात्र ने सोशल मीडिया पर शिक्षक को लेकर एक पोस्ट की थी, जिसको लेकर प्रिंसिपल ने पुलिस को शिकायत दी थी।
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आरोप के अनुसार पुलिस ने छात्र की पिटाई की थी और घर वापस आने के बाद छात्र ने आत्महत्या कर ली। याची ने कहा कि यदि जेजे एक्ट का पालन हुआ होता तो छात्र आत्महत्या नहीं करता। जेजे एक्ट के तहत यदि कोई नाबालिग किसी अपराध में लिप्त पाया जाता है तो उसे चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए। उक्त अधिकारी उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश करेगा। किसी भी स्थिति में नाबालिग को लॉकअप या जेल में नहीं रखा जाएगा।

याची ने कहा कि यदि ऐसा हुआ होता तो 17 साल का मासूम आत्महत्या न करता। याची ने कहा कि पंजाब व चंडीगढ़ को निर्देश दिया जाए कि भविष्य में इसका पालन सुनिश्चित हो। पंजाब सरकार ने याचिका में पक्ष बनाने का विरोध करते हुए कहा कि जो घटना हुई वह चंडीगढ़ में हुई, पंजाब को जबरन घसीटा जा रहा है। बच्चे की जेब से सुसाइड नोट मिला था, जिसमें लिखा था कि मैं अपने किए गए काम से शर्मिंदा हूं और इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं। किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है।
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