फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   If it had not been suspended for 10 years, Metro would have been running in the city today: Bansal

10 साल से लटकाया न होता तो आज शहर में दौड़ रही होती मेट्रो : बंसल

Sun, 07 Jan 2024 01:32 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jan 2024 01:32 AM IST
विज्ञापन
If it had not been suspended for 10 years, Metro would have been running in the city today: Bansal
चंडीगढ़। शहर में मेट्रो को लेकर प्रशासन उलझन में है। कभी एलिवेटेड तो कभी अंडरग्राउंड ट्रैक पर पेच फंसा हुआ है, जबकि 10 साल पहले ही सांसद रहते हुए मैंने शहर में अंडरग्राउंड मेट्रो और शहर के बाहर एलिवेटेड ट्रैक की सिफारिश की थी। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने कही। यूटी हेरिटेज कंजर्वेशन की सब कमेटी के प्रस्ताव में स्पष्ट तौर पर एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाने से इन्कार किया गया है। सब-कमेटी ने साफ कहा है कि शहर में अंडरग्राउंड ही मेट्रो ट्रैक बनना चाहिए।
विज्ञापन

बंसल ने कहा कि वह भी पिछले कई साल से यही बात कह रहे हैं, जिसे अब प्रशासन की हेरिटेज कंजर्वेशन की सब-कमेटी कह रही है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने उनकी बात मान ली होती तो आज शहर में मेट्रो चल रही होती। भाजपा शासित प्रशासन ने शहर को 10 साल पीछे ला दिया। बंसल ने कहा कि चंडीगढ़ में मेट्रो अंडरग्राउंड ही चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली में चांदनी चौक जैसे इलाके में 95 फीट नीचे तक मेट्रो चल सकती है तो चंडीगढ़ में क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि 10 साल पहले जब कांग्रेस ने मेट्रो प्रोजेक्ट प्रपोज किया था, तब इसकी एलाइनमेंट तक हो चुकी थी। आज शहर में ट्रैफिक बढ़ गया है और 10 साल में मेट्रो बनाने की कॉस्ट भी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। भाजपा के पास चंडीगढ़ शहर के लिए कभी कोई दृष्टिकोण नहीं था। भाजपा इस शहर को 10 साल में बहुत पीछे ले गई।
विज्ञापन


भाजपा के राज में कितनों को नौकरी मिली, सांसद दें जवाब
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जीएमसीएच 32 में 102 पदों के रिव्यू प्रस्ताव को खारिज किए जाने पर सख्त एतराज जताया है। पवन बंसल ने कहा कि सरकार चंडीगढ़ में स्वास्थ्य क्षेत्र के महत्वपूर्ण संस्थान चाहे वह पीजीआई हो, जीएमसीएच 32 या फिर सेक्टर 16 का अस्पताल, उनमें रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करती है और फिर 3 वर्षों के बाद उन रिक्त पदों को ही खारिज कर दिया जाता है, तो इससे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था क्यों नहीं चरमराएगी। ये संस्थान डेपुटेशन पर आने वाले डॉक्टरों के भरोसे हैं, जबकि मरीज़ों के बढ़ते बोझ को देखते हुए यहां स्टाफ की ज़रूरत भी लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed