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किसी को दिल का दौरा पड़ जाए तो तुरंत ये करें
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 06 Jan 2014 11:53 AM IST
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अगर किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ रहा हो तो तुरंज हैंड्स ओनली सीपीआर किया जाना चाहिए। यह कहना है फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉक्टरों का।
शहर के एलांते माल में फोर्टिस हॉस्पिटल की ओर से एक फ्लैश मॉब किया गया था। मॉब के जरिए बताया गया कि जब किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़े तो उसकी जिंदगी हैंड्स ओनली सीपीआर के जरिए बचाया जा सकता है।
इस तकनीक का संदेश एलांते मॉल में बड़े ही आकर्षक अंदाज में पेश किया गया। एलांते माल में शाम के वक्त फोर्टिस के डॉक्टर व अन्य कर्मी अचानक पहुंचे और ‘स्टेइन अलाइव’ के धुन पर थिरकना शुरू कर दिया और हैंडस-ऑनली सीपीआर के आसान तरीकों के बारे में बताया।
यहां बताया गया कि सीपीआर में मरीज की छाती को कम से कम 5 सेंटीमीटर (2 इंच) गहराई और 100 बार प्रति मिनट की दर से दबाना चाहिए, ताकि दिल से होता हुआ खून पूरे शरीर तक पहुंचना शुरू हो जाए।
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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सीपीआर सत्रों के लिए ‘स्टेइन अलाइव’ गीत इसलिए चुना क्योंकि इस गाने की बीट्स मरीज की छाती पर दबाव के लिए जरूरी दर के साथ दबाव की संख्या से मेल खाती हैं।
फोर्टिस अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट के डॉक्टर अरुण शर्मा ने बताया, ‘सीपीआर से टिश्यू डैथ में देरी होती है और दिमाग को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचाए बिना एक सफल री-सक्सिटेशन के लिए छोटी सी खिड़की खुलती है।
उन्होंने कहा कि देश में जिन करीब 7.5 लाख लोगों की मौत दिल का दौरा पड़ने से होती है, उन्हें तभी बचाया जा सकता है यदि आसपास लोगों को हैंड्स ऑनली सीपीआर के बारे में पता हो।
डा. अरुण ने बताया, ‘चूंकि ऐसे दिल के दौरे आमतौर पर अस्पतालों से बाहर ही पड़ा करता हैं, इसलिए बतौर डॉक्टरी पेशे में होने के कारण हमारा कर्तव्य है कि समाज को सीपीआर स्मार्ट बनाया जाए।’
फोर्टिस अस्पताल ने गहन शोध के बाद ही इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है और हमें लगता है कि समाज में और बेहतर ढंग से इसके प्रचार-प्रसार से दिल का दौरा पड़ने से मरने वाले लोगों की संख्या कम की जा सकती है।
शुरुआती तौर पर हम अभी ट्राइसिटी पर ही ध्यान केंद्रित किए हुए। इसके बाद यह फ्लैश मॉब स्कूलों, कालेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में किया जाएगा।
इस मौके पर फोर्टिस की टीम ने एक हस्ताक्षर कैंपेन चलाया, जिसमें उन्होंने लोगों को सीपीआर के बारे में जानकारी लेने की शपथ दिलाई।
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शहर के एलांते माल में फोर्टिस हॉस्पिटल की ओर से एक फ्लैश मॉब किया गया था। मॉब के जरिए बताया गया कि जब किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़े तो उसकी जिंदगी हैंड्स ओनली सीपीआर के जरिए बचाया जा सकता है।
इस तकनीक का संदेश एलांते मॉल में बड़े ही आकर्षक अंदाज में पेश किया गया। एलांते माल में शाम के वक्त फोर्टिस के डॉक्टर व अन्य कर्मी अचानक पहुंचे और ‘स्टेइन अलाइव’ के धुन पर थिरकना शुरू कर दिया और हैंडस-ऑनली सीपीआर के आसान तरीकों के बारे में बताया।
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यहां बताया गया कि सीपीआर में मरीज की छाती को कम से कम 5 सेंटीमीटर (2 इंच) गहराई और 100 बार प्रति मिनट की दर से दबाना चाहिए, ताकि दिल से होता हुआ खून पूरे शरीर तक पहुंचना शुरू हो जाए।
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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सीपीआर सत्रों के लिए ‘स्टेइन अलाइव’ गीत इसलिए चुना क्योंकि इस गाने की बीट्स मरीज की छाती पर दबाव के लिए जरूरी दर के साथ दबाव की संख्या से मेल खाती हैं।
फोर्टिस अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट के डॉक्टर अरुण शर्मा ने बताया, ‘सीपीआर से टिश्यू डैथ में देरी होती है और दिमाग को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचाए बिना एक सफल री-सक्सिटेशन के लिए छोटी सी खिड़की खुलती है।
उन्होंने कहा कि देश में जिन करीब 7.5 लाख लोगों की मौत दिल का दौरा पड़ने से होती है, उन्हें तभी बचाया जा सकता है यदि आसपास लोगों को हैंड्स ऑनली सीपीआर के बारे में पता हो।
डा. अरुण ने बताया, ‘चूंकि ऐसे दिल के दौरे आमतौर पर अस्पतालों से बाहर ही पड़ा करता हैं, इसलिए बतौर डॉक्टरी पेशे में होने के कारण हमारा कर्तव्य है कि समाज को सीपीआर स्मार्ट बनाया जाए।’
फोर्टिस अस्पताल ने गहन शोध के बाद ही इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है और हमें लगता है कि समाज में और बेहतर ढंग से इसके प्रचार-प्रसार से दिल का दौरा पड़ने से मरने वाले लोगों की संख्या कम की जा सकती है।
शुरुआती तौर पर हम अभी ट्राइसिटी पर ही ध्यान केंद्रित किए हुए। इसके बाद यह फ्लैश मॉब स्कूलों, कालेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में किया जाएगा।
इस मौके पर फोर्टिस की टीम ने एक हस्ताक्षर कैंपेन चलाया, जिसमें उन्होंने लोगों को सीपीआर के बारे में जानकारी लेने की शपथ दिलाई।