{"_id":"667ad2286ccb6cfa7f074dac","slug":"icds-officers-again-on-the-path-of-agitation-demonstration-at-the-directorate-on-28th-chandigarh-news-c-16-1-pkl1007-453576-2024-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: फिर आंदोलन की राह पर आईसीडीएस ऑफिसर्स, 28 को निदेशालय पर प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: फिर आंदोलन की राह पर आईसीडीएस ऑफिसर्स, 28 को निदेशालय पर प्रदर्शन
विज्ञापन
चंडीगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग की वादाखिलाफी के खिलाफ आईसीडीएस ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन एक बार फिर आंदोलन की राह पर है। 28 जून को पंचकूला निदेशालय पर रोष प्रदर्शन किया जाएगा। यह फैसला सर्वसम्मति से एसोसिएशन की राज्यस्तरीय बैठक में लिया गया। इसकी अध्यक्षता एसोसिएशन की राज्य प्रधान सबिता ने की।
राज्य प्रधान व सह सचिव डॉ. मंजू ने कहा कि संगठन लंबे समय से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहा है। विभाग की निदेशक की ओर से बैठक में बार-बार मांगें पूरा करने का आश्वासन दिया जाता है और बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट भी निकाल दी जाती है। लेकिन उस पर अमल नहीं किया जाता। महिला एवं बाल विकास विभाग की सभी अधिकारियों का मूल वेतन दूसरे विभाग के समकक्ष अधिकारियों से काफी कम है, जबकि विभाग का कार्य बहुत ही महत्व का है। इस विभाग में सुपरवाइजर व महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी का मूल वेतन एक समान है, जो कि बड़ी विसंगति है। उन्होंने कहा कि विभाग में महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारियों के 148 पद हैं, जिनमें से मात्र 66 पद भरे हुए हैं और 86 पद रिक्त हैं। केवल पदोन्नति करने से काम नहीं चल रहा है। सरकार सीधी भर्ती नहीं कर रही है। पलवल जिले में एक भी महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी नहीं है और सिरसा व फतेहाबाद जिले में केवल एक-एक महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यरत है। उन्होंने बताया कि फतेहाबाद में उसी एक महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी को जिला कार्यक्रम अधिकारी का चार्ज भी दिया गया है। काम की अधिकता व स्टाफ की कमी के कारण अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर मजबूर हो रही हैं। विभाग की ओर से एलटीसी का बजट भी नहीं दिया गया है। तबादले न ही ऑनलाइन और न हीं ऑफलाइन किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
राज्य प्रधान व सह सचिव डॉ. मंजू ने कहा कि संगठन लंबे समय से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहा है। विभाग की निदेशक की ओर से बैठक में बार-बार मांगें पूरा करने का आश्वासन दिया जाता है और बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट भी निकाल दी जाती है। लेकिन उस पर अमल नहीं किया जाता। महिला एवं बाल विकास विभाग की सभी अधिकारियों का मूल वेतन दूसरे विभाग के समकक्ष अधिकारियों से काफी कम है, जबकि विभाग का कार्य बहुत ही महत्व का है। इस विभाग में सुपरवाइजर व महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी का मूल वेतन एक समान है, जो कि बड़ी विसंगति है। उन्होंने कहा कि विभाग में महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारियों के 148 पद हैं, जिनमें से मात्र 66 पद भरे हुए हैं और 86 पद रिक्त हैं। केवल पदोन्नति करने से काम नहीं चल रहा है। सरकार सीधी भर्ती नहीं कर रही है। पलवल जिले में एक भी महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी नहीं है और सिरसा व फतेहाबाद जिले में केवल एक-एक महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यरत है। उन्होंने बताया कि फतेहाबाद में उसी एक महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी को जिला कार्यक्रम अधिकारी का चार्ज भी दिया गया है। काम की अधिकता व स्टाफ की कमी के कारण अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर मजबूर हो रही हैं। विभाग की ओर से एलटीसी का बजट भी नहीं दिया गया है। तबादले न ही ऑनलाइन और न हीं ऑफलाइन किए जा रहे हैं।
विज्ञापन