63वीं बार बदली कासनी की कुर्सी, तबादले के पीछे का सच
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भाजपा की सभी बैठकों में बेलगाम अफसरशाही का मुद्दा उठने के बाद अब अफसर सरकार के निशाने पर हैं। सरकार ने बुधवार को पांच आईएएस के तबादले कर दिए। तनातनी वाला रवैया अपनाने वाले अधिकारियों को स्वास्थ्य महकमे से दूर कर दिया गया है।
इनमें चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के महानिदेशक एवं सचिव प्रदीप कासनी, अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास और डॉ. राकेश गुप्ता का नाम शामिल हैं।
कासनी को अभिलेखागार विभाग के महानिदेशक एवं सचिव तथा रामनिवास को सिंचाई विभाग में भेजा गया है। मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. गुप्ता से स्वास्थ्य विभाग ले लिया गया है। इन तबादलों में सबसे ज्यादा हैरानी वाला तबादला आईएएस प्रदीप कासनी का है।
भाजपा सरकार में कासनी का तीसरा तबादला
पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार में निशाने पर रहे प्रदीप कासनी का भाजपा सरकार में यह तीसरा तबादला है। इससे पहले उन्हें गुड़गांव का आयुक्त लगाया था, लेकिन वहां से फिर हटाकर कई दिन तक कोई विभाग नहीं दिया गया। उनकी ईमानदारी से प्रभावित स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज फिर उन्हें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लाए और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग का महानिदेशक बनाया और अब उन्हें अभिलेखागार विभाग में लगा दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री विज की पसंद थे कासनी
विज की पसंद होने के बावजूद उन्हें वर्तमान पद से हटा दिया गया। दूसरी ओर स्वास्थ्य मंत्री विज की पसंद बन चुके केके खंडेलवाल अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग भी देखेंगे। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव खंडेलवाल अपने वर्तमान कार्य के अलावा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव पद भी देखेंगे।
सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव आरआर जोवल को स्वास्थ्य विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। इसी प्रकार हरियाणा भूमि-सुधार विकास निगम की प्रबंध निदेशक और हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की परियोजना निदेशक रेणु एस. फुलिया को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग का निदेशक व विशेष सचिव तथा हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के परियोजना निदेशक पद पर नियुक्त किया गया है।
तबादला सीएम का अधिकार क्षेत्र है। प्रदीप कासनी के तबादले के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह रुटीन की प्रक्रिया है।
- अनिल विज स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा
मेरी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है, जो जारी रहेगी। सरकार कहीं भी लगाए उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता है।
- प्रदीप कासनी, आईएएस
कल्पना चावला कॉलेज की फाइलें खंगाल रहे थे कासनी
हरियाणा के आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी एक बार फिर से सरकार के निशाने पर हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग से हटाकर कासनी को अभिलेखागार का रास्ता दिखाकर सरकार ने उनके प्रति अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। कासनी की 17 साल की सेवा अवधि में यह उनका 63वां तबादला है।
कासनी ने चिकित्सा शिक्षा को लेकर सख्ती शुरू कर दी थी। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का समय होने के कारण उन्होंने इन कॉलेजों पर भी नजर रखी। मंगलवार को कासनी करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में खर्च हुए करीब छह सौ करोड़ रुपये का हिसाब मांगते ही अपने पद के दायित्व से हाथ धो बैठे। गत दिनों कासनी ने मेडिकल कॉलेज में खर्च हुई राशि की डिटेल मांगी थी, जो वहां के उच्चाधिकारियों को रास नहीं आया।
नर्सिंग छात्राओं को लेकर निर्णय पर भी सीएम के सामने भाजपा के कई विधायक पहुंच गए थे। कासनी अब तक की सरकारों में साइड लाइन पोस्टिंग ही काटते आए हैं। अब भाजपा शासनकाल में गुड़गांव कमिश्नर का पद सौंपे जाने के बाद सरकार ने उन्हें एक माह तक खाली बिठाए रखा।
इसके बाद उन्हें चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन अब उन्हें मुक्त कर दिया गया है। कासनी हुड्डा सरकार के अंतिम दौर में सरकार के फैसलों के खिलाफ भी बोले। भाजपा को उस दौरान उनके सुर पसंद आए थे।