फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   IAS dheera khandelwal book release in haryana rajbhawan

उड़ रही हूं, कट जाऊंगी, एक पतंग हूं ना...

Fri, 05 Feb 2016 12:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 Feb 2016 12:59 PM IST
विज्ञापन
IAS dheera khandelwal book release in haryana rajbhawan

हरियाणा राजभवन में राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने वरिष्ठ आईएएस धीरा खंडेलवाल के हाइकू संग्रह ‘मन-मुकुर’ का विमोचन किया।

विज्ञापन


राजभवन में फरवरी की खिली धूप के साथ-साथ सूक्ष्म हिंदी कविता ‘हाइकू’ के ऐसे न जाने कितने रंग बिखरे दिखे। मौका तो था सूक्ष्म कविताओं की एक किताब की लांचिंग का, लेकिन अदीबों और कद्रदानों के बयानों का सिलसिला शुरू हुआ तो इतना लंबा खिंचा कि सुबह कब दोपहर में बदल गई, पता ही नहीं चला।

हरियाणा सरकार की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी धीरा खंडेलवाल के हाइकू संग्रह ‘मन-मुकुर’ का विमोचन राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी  के हाथों हुआ। प्रशासक के आंगन में एक अफसर की किताब का अनावरण था, इसलिए मंच पर और श्रोताओं में अफसरों की बहुतायत थी।
विज्ञापन


लेकिन जैसे जैसे महफिल जवान हुई, एक के बाद एक अफसरों ने साबित कर दिया कि अहसास और जज्बात के मोर्चे पर वे किसी से कम नहीं। देखते-देखते हाइकू यानी नन्ही कविता से शुरू हुआ ये सफर कैफी आज़मी, गुलज़ार और गालिब के लंबे अफसानों तक पहुंच गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

कार्यक्रम में समाचार पत्रों के संपादक भी मौजूद रहे

IAS dheera khandelwal book release in haryana rajbhawan

किताब की लेखिका धीरा खंडेलवाल, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के सचिव माधव कौशिक, उच्च शिक्षा व सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा में अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन, साहित्यकार व प्राचार्य शमीम शर्मा ने अपने-अपने तरीके से हाइकू लेखन के अर्थ बूझे। धीरा की किताब में झलके प्रकृति प्रेम, गरीबी विमर्श, औरत की विडंबना और समाज के विरोधाभास के सूत्र पकड़ कर सबने अपनी बातों को मुकाम पर पहुंचाया।

आखिर में स्वयं राज्यपाल ने भी तुलसी-रत्नावली के काव्यात्मक उद्धरणों के साथ लेखिका को आशीर्वाद दिया और श्रोताओं से किताब पढ़ने की अपील की। कार्यक्रम में आमंत्रित समाचार पत्रों के संपादकों ने भी अपने विचार रखे। लेकिन समारोह की स्टार धीरा खंडेलवाल ही थीं, जिन्होंने  न सिर्फ सबको हाइकू के अर्थ समझाए, बल्कि किताब के कुछ अंश पढ़कर भी सुनाए। उन्होंने बताया कि जापानी दर्शन से निकले हाइकू में कुल जमा सत्रह वर्ण होते हैं।

पहली पंक्ति में पांच वर्ण, दूसरी में सात और तीसरी में पांच। हाइकू लेखन न्यूनतम शब्दों में गहनतम बात कहने की कला है। गागर में सागर। इसीलिए राजभवन की यह सुबह पांच-सात-पांच की लय पर नाचती-झूमती रही। नोवा पब्लिकेशन्स एंड प्रिंटर्स द्वारा प्रकाशित इस किताब में 152 पृष्ठ हैं और मूल्य है 250 रुपये। लेखिका धीरा खंडेलवाल के इससे पहले तीन कविता संग्रह आ चुके हैं। इससे पहले उनका पहला हाइकू संग्रह ‘तारों की तरफ’ प्रकाशित हो चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed