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वाड्रा लैंड डील और ढींगरा आयोग को लेकर IAS खेमका का ट्वीट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 28 Aug 2016 09:09 AM IST
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हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका
- फोटो : फाइल फोटो
वाड्रा लैंड डील मामले की जांच कर रहे ढींगरा आयोग की रिपोर्ट आने से दो दिन पहले खेमका के कड़वे ट्वीट ने उनकी वेदना को उजागर कर दिया है। खेमका ने ट्वीट में भ्रष्टाचार के दोषियों पर निशाना साधते हुए जन न्याय पर सवाल खड़ा किया है और पूछा है कि घूस देने वाले को छोड़ देना क्या जन न्याय है। ढींगरा आयोग का कार्यकाल सरकार ने दूसरी बार बढ़ाया है।
पिछले दिनों आयोग को अपनी रिपोर्ट देनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से रिपोर्ट नहीं दे सका था। आयोग ने छह सप्ताह का समय मांगा था। जिसके बाद सरकार ने 31 अगस्त तक का समय दिया था। वर्तमान सरकार में भी खेमका के मतभेद पहले की तरह बरकरार हैं। हाल ही में चार्जशीट हुए खेमका अब संभल-संभल कर कदम रख रहे हैं। लिहाजा पहले उन्होंने अंग्रेजी में ट्वीट किया उसके बाद उसका हिंदी में अनुवाद कर ट्वीट किया।
मालूम हो कि आयोग ने अपनी जांच में अभी तक डीएलएफ या राबर्ट वाड्रा को तलब नहीं किया गया है। खेमका को भी आयोग की तरफ से जांच में शामिल होने का कोई समन नहीं आया है। बहरहाल जैन मुनि ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार को भी शामिल किया था। उन्होंने कहा था कि कई लोग अपने आप को ईमानदार होने का दावा करते हैं। जिसमें से अधिकतर वे होते हैं, जिन्हें बेईमानी का मौका नहीं मिलता। खेमका अफसर गैलरी में यह सारे प्रवचन बड़े गौर से सुन रहे थे और अगले ही दिन यह ट्वीट कर दिया।
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पिछले दिनों आयोग को अपनी रिपोर्ट देनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से रिपोर्ट नहीं दे सका था। आयोग ने छह सप्ताह का समय मांगा था। जिसके बाद सरकार ने 31 अगस्त तक का समय दिया था। वर्तमान सरकार में भी खेमका के मतभेद पहले की तरह बरकरार हैं। हाल ही में चार्जशीट हुए खेमका अब संभल-संभल कर कदम रख रहे हैं। लिहाजा पहले उन्होंने अंग्रेजी में ट्वीट किया उसके बाद उसका हिंदी में अनुवाद कर ट्वीट किया।
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मालूम हो कि आयोग ने अपनी जांच में अभी तक डीएलएफ या राबर्ट वाड्रा को तलब नहीं किया गया है। खेमका को भी आयोग की तरफ से जांच में शामिल होने का कोई समन नहीं आया है। बहरहाल जैन मुनि ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार को भी शामिल किया था। उन्होंने कहा था कि कई लोग अपने आप को ईमानदार होने का दावा करते हैं। जिसमें से अधिकतर वे होते हैं, जिन्हें बेईमानी का मौका नहीं मिलता। खेमका अफसर गैलरी में यह सारे प्रवचन बड़े गौर से सुन रहे थे और अगले ही दिन यह ट्वीट कर दिया।
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अशोक खेमका ने यह ट्वीट किया
हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका
स्वीटहार्ट डील घूस शब्द की शिष्टोक्ति है। प्रतिदान के करार से दी गई उत्कोच जन-धन की लूट है। घूस देने वाले को छोड़ना क्या जन न्याय होगा
Sweetheart deal is euphemism for bribe,- quid pro quo for undue favours. These loot public wealth. Letting briber scot-free wud be cover-up.
— Ashok Khemka, IAS (@AshokKhemka_IAS) August 27, 2016
Sweetheart deal घूस शब्द की शिष्टोक्ति है। प्रतिदान के करार से दी गई उत्कोच जन-धन की लूट है। घूस देने वाले को छोड़ना क्या जन न्याय होगा?
— Ashok Khemka, IAS (@AshokKhemka_IAS) August 27, 2016
आयोग कभी भी सौंप सकता है वाड्रा लैंड डील मामले में रिपोर्ट
हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका
- फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा में वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस ढींगरा आयोग की रिपोर्ट कभी भी मुख्यमंत्री को सौंपी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक आयोग का जो समय बढ़ाया गया था, उसकी समयसीमा 31 अगस्त को पूरी हो जाएगी। देखना यह होगा कि सरकार इस बार इस रिपोर्ट को उजागर करती है या नहीं।
सूत्रों का कहना है कि जाट आरक्षण आंदोलन में हिंसा के दौरान अफसरों की भूमिका की जांच करने वालीप्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट उजागर करने के बाद ढींगरा आयोग की रिपोर्ट उजागर करने के साइड इफेक्ट क्या होंगे, इस बात पर सरकारी स्तर से मंथन जारी है। फिलहा निगाहें ढींगरा आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
रिपोर्ट का सबसे ज्यादा इंतजार इस पूरे मामले को सुर्खियों में लाने वाले आईएएस अफसर अशोक खेमका को है। मई 2015 में खट्टर सरकार ने इस आयोग का गठन किया था। मामले में 250 से ज्यादा फाइलें आयोग पढ़ चुका है। हरियाणा के तीन आईएएस अधिकारी आयोग के समक्ष तलब भी हो चुके हैं। इसमें आईएएस टीसी गुप्ता, डीएस ढेसी और एसएस ढिल्लो शामिल हैं।
उक्ताधिकारियों ने आयोग को बताया है कि लाइसेंस देने की प्रक्रिया में कुछ नया नहीं है। लाइसेंस सभी सरकारों में एक ही प्रक्रिया के तहत दिए जाते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक एक अधिकारी ने तो अब तक दिए गए लाइसेंसों का हवाला भी दे दिया है। आयोग ने एक प्रश्नसारिणी बनाकर अधिकारियों से यह सवाल किए थे।
सूत्रों का कहना है कि जाट आरक्षण आंदोलन में हिंसा के दौरान अफसरों की भूमिका की जांच करने वालीप्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट उजागर करने के बाद ढींगरा आयोग की रिपोर्ट उजागर करने के साइड इफेक्ट क्या होंगे, इस बात पर सरकारी स्तर से मंथन जारी है। फिलहा निगाहें ढींगरा आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
रिपोर्ट का सबसे ज्यादा इंतजार इस पूरे मामले को सुर्खियों में लाने वाले आईएएस अफसर अशोक खेमका को है। मई 2015 में खट्टर सरकार ने इस आयोग का गठन किया था। मामले में 250 से ज्यादा फाइलें आयोग पढ़ चुका है। हरियाणा के तीन आईएएस अधिकारी आयोग के समक्ष तलब भी हो चुके हैं। इसमें आईएएस टीसी गुप्ता, डीएस ढेसी और एसएस ढिल्लो शामिल हैं।
उक्ताधिकारियों ने आयोग को बताया है कि लाइसेंस देने की प्रक्रिया में कुछ नया नहीं है। लाइसेंस सभी सरकारों में एक ही प्रक्रिया के तहत दिए जाते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक एक अधिकारी ने तो अब तक दिए गए लाइसेंसों का हवाला भी दे दिया है। आयोग ने एक प्रश्नसारिणी बनाकर अधिकारियों से यह सवाल किए थे।