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खेमका: 24 साल में 46 तबादले, आखिर क्यों?

Thu, 02 Apr 2015 12:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 02 Apr 2015 12:09 PM IST
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ias ashok khemka special story, 24 year duty and 46 transffer

रॉबर्ट वाड्रा लैंड डील को कैंसल कर सुर्खियों में आए सीनियर आईएएस अशोक खेमका अब हरियाणा की खट्टर सरकार को भी खटक गए हैं। सत्ता में आते ही उन्हें मुख्यधारा में लाने वाली हरियाणा सरकार ने उन्हें इतने कम समय में ही साइड लाइन कर दिया है। खेमका का 24 सालों में यह 46वां तबादला है। उन्हें परिवहन आयुक्त जैसे अहम पद से हटाकर कम महत्व वाले पुरातत्व व संग्रहालय विभाग में डीजी और सचिव लगाया गया है।

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खेमका का नाम देर शाम जारी हुई 9 आईएएस अफसरों व एक एचसीएस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट में शामिल है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, खेमका का पहले भी कार्यकाल काफी विवादों से भरा रहा।
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उनकी पहली पोस्टिंग सन 1993 में हुई थी। उनके पूरे कार्यकाल में उनकी अधिकतर पोस्टिंग कुछ महीने ही चलीं। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों में 8 पोस्ट ऐसी संभालीं, जोकि महीने भर या उससे भी कम समय के लिए थीं।
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संयोग से, उनकी 44 में से 12 पोस्टिंग ऐसे विभागों में हुई जहां उन्हें जमीनी कामकाज में डील करना था। जहां भूमि के अधिग्रहण से लेकर उसके रेकॉर्ड, रेवेन्यू और विकास तक की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी।

मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल की एग्जेक्युटिव रेकॉर्ड शीट (ईआरएस) में दर्ज जानकारी के मुताबिक, खेमका ने केवल दो ही ऐसी पोस्टिंग संभाली हैं जो एक साल से ज्यादा समय तक रही हों। 2005-06 में यह उनका पहला कार्यकाल था जब उन्होंने शहरी विकास विभाग में बतौर मुख्य प्रबंधक डेढ़ साल के लिए काम किया। खेमका ने उद्योग विभाग में 2008 से 2010 के बीच, यानी एक साल 10 महीने तक प्रबंध निदेशक के तौर पर काम किया।

ऐसे चर्चा में आए खेमका

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12 अक्तूबर 2012 को वह उस समय सबसे अधिक सुर्खियों में छाए जब चकबंदी महानिदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन को लेकर हुई डील की म्यूटेशन रद्द कर दी थी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने इस प्रकरण के बाद खेमका का स्थानांतरण हरियाणा बीज विकास निगम के महानिदेशक पद पर कर दिया था।

मुख्यमंत्री तक का आदेश नहीं माना था

पश्चिम बंगाल में पैदा हुए अशोक खेमका ने आईआईटी खड़गपुर से ग्रैजुएशन करने के बाद मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी हासिल की। उन्होंने एमबीए की डिग्री भी हासिल की है। अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं। अपनी ईमानदारी के अलावा उन्हें नियमों के जानकार के तौर पर भी जाना जाता है। कहा जाता है कि विभाग के सीनियर अधिकारी भी उनसे कई बार राय लेते हैं।

अपने भ्रष्टाचार विरोधी तेवरों के चलते वह काफी लोकप्रिय रहे। 2004 में जब सरकार ने कई शिक्षकों का सत्र के बीच में ही तबादला किया था, तो उन्होंने तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला तक का आदेश मानने से इनकार कर दिया था। रॉबर्ट वाड्रा विवाद के दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने बार-बार ट्रांसफर पर अफसोस जताया था। उन्होंने कहा था, 'सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, मुझे हर बार अपनी ईमानदारी की सजा भुगतनी पड़ी क्योंकि मैं लगातार घपलों और घोटालों का पर्दाफाश करता रहा हूं।'

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