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मैं अपने वतन में अमन चाहता हूं, सभी दुश्मनों का दमन चाहता हूं...
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चंडीगढ़। मैं अपने वतन में अमन चाहता हूं, सभी दुश्मनों का दमन चाहता हूं... अनीश गर्ग ने जैसे ही अपनी यह रचना पेश की सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। मौका था सेक्टर-35 के प्राचीन कला केंद्र में रविवार को कवि सम्मेलन के आयोजन का। संस्कार भारती चंडीगढ़, प्राचीन कला केंद्र और बृहस्पति कला केंद्र की ओर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार नलिनी विभा नाजली ने की। मंच संचालन कवि वीरेंद्र शर्मा वीर ने किया। कार्यक्रम के आगाज से पहले जय गोपाल अश्क अमृतसरी को श्रद्धासुमन अर्पित की गई। 93 वर्ष की आयु में 15 सितंबर को उनका निधन हो गया था।
कवि सम्मेलन की शुरुआत कवयित्री अनुष्का तिवारी की रचना कहीं गुम हो जाना है मुझे जहां हुंकार मेरा हो... से हुई। उन्होंने लोगों की तालियों के साथ वाहवाही भी लूटी। ऋषि राज ने बात गुरुओं से करनी हो तो करना नजर झुका के, दिल हल्का कर सकते हो मां को दर्द बता के... पेश किया। प्रतिभा माही ने गजल चमन महके जो कलियों से सुहाना लगता है, मगर उसको संजोने में जमाना लगता है... पेश कर खूब तालियां बटोरीं। उर्मिला कौशिक ‘सखी’ ने देशभक्ति की कविता जीवन की पगडंडी पर कई यात्राएं होती हैं, कुछ दल-बल के साथ तो कुछ नितांत अकेले चलती हैं.. पेश की। सुशील हसरत नरेलवी ने गजल ये चिरागां आशियाने शोहरतें किस काम कीं, घर में बच्चा या कोई बूढ़ा गर नाशाद है... पेश किया। नलिनी विभा नाजली ने गजल कोई उस जैसा न हुआ..पेश कर वाहवाही लूटी। इस अवसर पर संस्कार भारती चंडीगढ़ इकाई के अध्यक्ष एवं कलाकार यशपाल कुमार, केके शारदा, कवि प्रेम विज, डीपी गंगवार, डीपी सिंह, कवि बलबीर तन्हा, कवि अशोक नादिर और कवयित्री संतोष धीमान उपस्थित रहीं।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत कवयित्री अनुष्का तिवारी की रचना कहीं गुम हो जाना है मुझे जहां हुंकार मेरा हो... से हुई। उन्होंने लोगों की तालियों के साथ वाहवाही भी लूटी। ऋषि राज ने बात गुरुओं से करनी हो तो करना नजर झुका के, दिल हल्का कर सकते हो मां को दर्द बता के... पेश किया। प्रतिभा माही ने गजल चमन महके जो कलियों से सुहाना लगता है, मगर उसको संजोने में जमाना लगता है... पेश कर खूब तालियां बटोरीं। उर्मिला कौशिक ‘सखी’ ने देशभक्ति की कविता जीवन की पगडंडी पर कई यात्राएं होती हैं, कुछ दल-बल के साथ तो कुछ नितांत अकेले चलती हैं.. पेश की। सुशील हसरत नरेलवी ने गजल ये चिरागां आशियाने शोहरतें किस काम कीं, घर में बच्चा या कोई बूढ़ा गर नाशाद है... पेश किया। नलिनी विभा नाजली ने गजल कोई उस जैसा न हुआ..पेश कर वाहवाही लूटी। इस अवसर पर संस्कार भारती चंडीगढ़ इकाई के अध्यक्ष एवं कलाकार यशपाल कुमार, केके शारदा, कवि प्रेम विज, डीपी गंगवार, डीपी सिंह, कवि बलबीर तन्हा, कवि अशोक नादिर और कवयित्री संतोष धीमान उपस्थित रहीं।
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