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'जज साहब! पत्नी को घरवालों ने अवैध हिरासत में रखा', हाईकोर्ट ने पति पर ही लगाया 50 हजार जुर्माना
Tue, 04 Jun 2019 10:19 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 04 Jun 2019 10:19 AM IST
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फाइल फोटो
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शख्स ने आरोप लगाया कि पत्नी को उसके ही मायके वालों ने अवैध रूप से हिरासत में रखा हुआ है। हाईकोर्ट ने पति पर ही 50 हजार का जुर्माना लगा दिया। हाईकोर्ट ने पत्नी को अवैध हिरासत में बताते हुए उसके मायके से उसे वापस लाने से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह याचिका वैवाहिक विवाद में पत्नी को परेशान करने का माध्यम मात्र है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए पलवल के सीजेएम को इसकी रिकवरी करके याची की पत्नी को सौंपने के आदेश दिए हैं। साथ ही दो माह की मोहलत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस अवधि में राशि जमा नहीं करवाई जाती है तो प्रॉपर्टी बेच कर इस राशि की रिकवरी की जाए।
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हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह याचिका वैवाहिक विवाद में पत्नी को परेशान करने का माध्यम मात्र है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए पलवल के सीजेएम को इसकी रिकवरी करके याची की पत्नी को सौंपने के आदेश दिए हैं। साथ ही दो माह की मोहलत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस अवधि में राशि जमा नहीं करवाई जाती है तो प्रॉपर्टी बेच कर इस राशि की रिकवरी की जाए।
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ये है मामला
याचिका दाखिल करते हुए धीरज ने हाईकोर्ट को बताया था कि उसकी पत्नी को मायके वालों ने अवैध हिरासत में रखा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करके जवाब तलब किया तो पत्नी कोर्ट में पेश हुई। पत्नी ने बताया कि वह अपनी मर्जी से अपने मायके में रह रही है। उस पर न तो कोई दबाव है और न ही उसे अवैध हिरासत में रखा गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि फैमिली कोर्ट में विवाद के दौरान याची ने कहा था कि उसकी पत्नी अपने मायके वालों के प्रभाव में आकर याची से लड़ती है। घर के काम नहीं करती है और याची की कोई बात भी नहीं मानती है। इन तथ्यों के सामने आने पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि अपने निजी विवादों का निपटारा करने और अपनी पत्नी को परेशान करने के लिए कोर्ट का कीमती समय खराब किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि फैमिली कोर्ट में विवाद के दौरान याची ने कहा था कि उसकी पत्नी अपने मायके वालों के प्रभाव में आकर याची से लड़ती है। घर के काम नहीं करती है और याची की कोई बात भी नहीं मानती है। इन तथ्यों के सामने आने पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि अपने निजी विवादों का निपटारा करने और अपनी पत्नी को परेशान करने के लिए कोर्ट का कीमती समय खराब किया है।