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पंचकूला के रेहड़ी-फडी वालों की याचिका पर हुडा को अवमानना नोटिस

Mon, 23 Jan 2017 08:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 23 Jan 2017 08:25 PM IST
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HUDA Panchkula, contempt notice, plea of street vendors
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने पंचकूला में स्ट्रीट वेंडरों को उनके स्थान से हटाने और चालान ड्राइव चलाने के मामले मे दाखिल अवमानना याचिका पर हुडा तथा पंचकूला पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए फुटपाथ वर्कर स्वरोजगार बचाओ संघर्ष समिति ने कहा है कि 16 नवंबर 2015 को हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर स्ट्रीट वेंडरों पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। इन आदेशों के तहत पहले से मौजूद किसी भी वेंडर को उसके स्थान से हटाया नहीं जा सकता था। इसके तहत सबसे पहले टाउन वेंडिंग कमेटी बनाई जानी थी, जिसे अपना सर्वे पूरा करना था। सर्वे पूरा होने के बाद वेंडरों को सर्टिफिकेट दिए जाने थे, ताकि उनकी पहचान की जा सके। जब तक यह कार्य पूरा नहीं होता कोई चालान नहीं करने के आदेश थे। 
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याची ने कहा कि पंचकूला में लगातार हुडा और पुलिस वेंडरों को परेशान कर रही है। दलील दी जाती है कि आदेशों के बारे में प्रतिवादियों को पता नहीं था। जबकि ऐसा हो ही नहीं सकता, क्योंकि मुख्य आदेशों के बाद कई अवमानना याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। इन पर हुडा को नोटिस भी जारी हो चुका है। बावजूद इसके हुडा के अधिकारी वेंडरों को परेशान करने पर तुले हुए हैं।
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याची ने कहा, रोजी-रोटी छीनने के लिए काटे जा रहे चालान

HUDA Panchkula, contempt notice, plea of street vendors
highcourt - फोटो : File Photo
याची ने कहा कि साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र एकता हाकर्स यूनियन बनाम एमसी ग्रेटर मुंबई मामले का फैसला सुनाते हुए टाउन वेंडिंग कमेटी बनाने के आदेश दिए थे। इन आदेशों के बाद देश भर के वेंडरों के लिए भारत सरकार ने मार्च 2014 में स्ट्रीट वेंडर (प्रोटेक्शन ऑफ लिविंगहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेडिंग) एक्ट पास किया था। इस एक्ट को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद एक मई 2014 से लागू किया गया था। 

याची ने कहा कि इस एक्ट के तहत हर शहर में स्ट्रीट वेंडरों के लिए टाउन वेंडिंग कमेटी बनाने का प्रावधान है। इन प्रावधानों का पालन ज्यादातर स्थानों पर नहीं की जा रही है। याची ने कहा कि इसके अभाव में अधिकारी महीने में जब मन करता है आकर चालान काट देते हैं।

महीने में अधिकतम चालान की कोई सीमा तय नहीं की गई है। इस बारे में कई बार वेंडरों की एसोसिएशन ने हाईकोर्ट की शरण ली है और लगातार कई अवमानना याचिकाएं हाईकोर्ट में पहुंच चुकी हैं। अभी बीते दिनों एक बार फिर स्ट्रीट वेंडरों को हटाने के लिए हुडा व पुलिस ने मिलकर ड्राइव चलाई थी, जिसमें वेंडरों को जबरन उनके स्थान से हटाया गया। 
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