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गुरुद्वारों पर कब्जा रोकने पहुंची टास्क फोर्स

Fri, 18 Jul 2014 04:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 18 Jul 2014 04:26 PM IST
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HSGPC: HGPC Task Force arrived at gurdwaras in Haryana

हरियाणा में सिखों की अलग कमेटी (हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) का गठन रोकने में नाकाम रही एसजीपीसी और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने आक्रामक तेवर अख्तियार कर लिए हैं।

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एचएसजीपीसी को हरियाणा के गुरुद्वारों पर कब्जा करने से रोकने के लिए वीरवार को शिअद ने जहां सैकड़ों सिखों को पंजाब से हरियाणा के लिए रवाना कर दिया वहीं अमृतसर से मिली जानकारी के अनुसार, एसजीपीसी ने भी टास्क फोर्स के 150 सदस्यों को हरियाणा के विभिन्न गुरुद्वारों में भेज दिया है।
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पंजाब से भेजे गए सिखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एचएसजीपीसी को गुरुद्वारों पर कब्जा न करने दें और अगले आदेश तक हरियाणा में ही ठहरें। इस बीच पंजाब विधानसभा में एचएसजीपीसी के गठन को गैर कानूनी करार देते हुए प्रस्ताव पारित किया गया है।

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अंतिम सीमा तक विरोध करने के निर्देश

HSGPC: HGPC Task Force arrived at gurdwaras in Haryana

चीका स्थित गुरुद्वारा पातशाही छठी और नौवीं साहिब में वीरवार को पंजाब नंबर की दर्जनों कारों व जीपों में सवार होकर भारी संख्या में सिख पहुंचे हैं।

हालांकि इनमें अधिकतर पंथ का प्रचार करने वाले जत्थों के सदस्य बताए जा रहे हैं। उधर, अमृतसर में सूत्रों के अनुसार, एसजीपीसी की टास्क फोर्स के करीब 150 कर्मचारियों को हरियाणा भेजते हुए निर्देश दिए गए हैं कि एचएसजीपीसी द्वारा गुरुद्वारों पर कब्जे के दौरान अंतिम सीमा तक विरोध जताया जाए।

एसजीपीसी ने अमृतसर में अपने कुछ प्रमुख अधिकारियों को छोड़ बाकी सभी नेताओं को भी हरियाणा भेज दिया है। इसके साथ ही कुछ विधायक और पूर्व विधायक भी हरियाणा भेजे गए हैं।

बादल के पूर्व सचिव भी पहुंचे

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वीरवार को यहां आने वाले नेताओं में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पूर्व सचिव दरबारा सिंह, बाबा टेक सिंह धनौला, सुखदेव सिंह कैरों, गोबिंद सिंह लोंगोवाल, बूटा शाह व वरदेव सिंह मुख्य रूप से शामिल हैं।

सिख नेता पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से बचते रहे। पूछे जाने पर उन्होंने अपने आगमन को महज एक धार्मिक यात्रा करार दिया। उन्होंने कहा कि चीका का गुरुद्वारा ऐतिहासिक है। जब वे गुहला चीका से गुजर रहे थे तो उन्होंने सोचा कि गुरुद्वारे के दर्शन कर लें।

इसलिए दर्शन करके व लंगर छककर यहां से चले जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि इसके पीछे किसी प्रकार की कोई भी राजनीति नहीं है।

सिख नेताओं ने की गुप्त मंत्रणा

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बादल के पूर्व सचिव दरबारा सिंह ने गुरुद्वारे में सिख नेताओं से एक गुप्त मीटिंग की। मीटिंग में बाहर से किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई थी। सूत्रों के अनुसार, मीटिंग का एजेंडा सरकार द्वारा अलग कमेटी बनाने के बाद गुरुद्वारों पर कब्जा करने की नई कमेटी की नीति विफल करना बताया गया है।

अकाली दल के प्रदेशाध्यक्ष शरणजीत सिंह सौथा ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के ऐतिहासिक गुरुद्वारों पर कब्जे करवाना चाहती है, लेकिन सरकार की यह नीति किसी भी सूरत में सफल नहीं होने दी जाएगी।

हरियाणा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व एसजीपीसी सदस्य अवतार सिंह चक्कू लदाना ने इस संबंध में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इतना ही कहा कि नई कमेटी कानून के तहत बन रही है और कमेटी जब वजूद में आएगी तो वह गुरुद्वारों का प्रबंध लेने के लिए कोई गैर कानूनी रास्ता नहीं अपनाएगी।

चीका सहित प्रदेश के अन्य गुरुद्वारों में आए पंजाब के अकाली नेताओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें पता है, लेकिन उनकी मर्जी है, वे जो मर्जी करें।

हरियाणा में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़े

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सूत्रों के अनुसार, एसजीपीसी की टास्क फोर्स के करीब 150 कर्मचारियों को हरियाणा के अलग-अलग गुरुद्वारों में भेजा गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि अलग एसजीपीसी के गुरुद्वारों पर कब्जे के दौरान अंतिम सीमा तक विरोध जताया जाए।

इस समय एसजीपीसी के 5-7 अधिकारियों के अलावा सभी को हरियाणा भेज दिया गया है। कुछ एमएलए और पूर्व एमएलए भी वहां भेजे गए हैं।

वहीं अपुष्ट सूत्रों के अनुसार टास्क फोर्स कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस मामले में ऐसे हालात बना दिए जाएं कि विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़े। हालांकि एसजीपीसी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार ऐसा नहीं है।

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