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मरीजों को कैसे मिले बेहतर इलाज, जब मानकों से हो रहा हो खिलवाड़

Thu, 26 May 2022 01:57 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 01:57 AM IST
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How to get better treatment for patients, when standards are being played with
चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल के सरकारी अस्पतालों का हाल बदहाल है। पीजीआई और जीएमसीएच 32 में मानकों की अनदेखी कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं व्यवस्था सुधारने में अस्पताल प्रशासन भी नाकाम है। इसकी वजह डिमांड के अनुसार मानव संसाधन व अन्य आवश्यक जरूरतों का पूरा न होना है।
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देश के शीर्ष संस्थान में दूसरे पायदान पर पीजीआई में सैकड़ों मरीजों को स्ट्रेचर पर भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। यही हाल जीएमसीएच 32 का भी है। मरीजों का दबाव इतना ज्यादा है कि अस्पताल के कर्मचारी दोगुने से भी ज्यादा काम कर रहे हैं। इसके बावजूद काम अधूरा रह जा रहा है। इससे उनका तनाव बढ़ता रहा है। तनाव में विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जा रहा है। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन की ओर से तमाम दाव किए जा रहे हैं लेकिन उन्हें पूरा होने में कई वर्ष लग सकते हैं। इसी बीच मरीजों के दबाव को देखें तो इलाज के इंतजार में सांसें उखड़ रही हैं।
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पीजीआई और जीएमसीएच में जिस रफ्तार से मरीजों की संख्या बढ़ रही है उसकी तुलना में नर्सिंग ऑफिसर की संख्या बेहद कम है। इसे देखते पीजीआई में 1500 और जीएमसीएच 32 में 656 पद सृजन करने की योजना बनाई गई थी। इसका प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया था लेकिन 10 वर्षों से पद सृजन की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में मानक के अनुसार 10 मरीजों पर ड्यूटी करने वाले स्टाफ को 100 मरीज संभालना पड़ रहा है। इससे एक तरफ मरीजों को बेहतर इलाज से वंचित होना पड़ रहा है वहीं काम के दबाव में नर्सिंग स्टाफ भी दबता जा रहा है।
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बेड की कमी बनी परेशानी का कारण
चंडीगढ़ में शहर की जनता के साथ एक साल में देशभर के लगभग 35 लाख मरीजों को इलाज मिल रहा है। इसमें पीजीआई में लगभग 27 से 28 लाख व जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में 6 से 7 लाख मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए 3720 बेड का संचालन किया जा रहा है। स्थिति यह है कि पीजीआई और जीएमसीएच में दबाव इतना ज्यादा है कि 400 से 500 मरीजों को स्ट्रेचर पर भर्ती की इलाज किया जा रहा है। तमाम उपायों के बावजूद बेड की कमी वाली स्थिति दूर नहीं हो पा रही है।
रात 8 बजे तक चलती है ओपीडी
पीजीआई में मरीजों का दबाव इस कदर बढ़ रहा है कि ओपीडी में रात 8 बजे तक मरीज देखे जा रहे हैं। हेप्टोलॉजी समेत कुछ अन्य विभागों में विशेषज्ञ सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। फिर भी अगली ओपीडी में मरीजों की संख्या कम नहीं हो पा रही।
नेहरू एक्सटेंशन और सेक्टर 48 का भी नहीं मिल पा रहा लाभ
400 बेड वाले पीजीआई के नेहरू एक्स्टेंशन, 100 बेड के सेक्टर 48 के अस्पताल का भी लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। वजह यह है कि इन दोनों अस्पतालों में मानव संसाधन की व्यवस्था न होना है। मरीजों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए पीजीआई और सेक्टर-48 में नई बिल्डिंग तो बना दी गई, लेकिन उसे चलाने के लिए डॉक्टर और अन्य स्टाफ की तैनाती नहीं की। अकेले सेक्टर 48 के अस्पताल को संचालित करने के लिए 74 डॉक्टर, 161 पैरामेडिकल स्टाफ, 10 प्रशासनिक अधिकारी, एक ज्वाइंट कंट्रोलर, एक डिप्टी कंट्रोलर और एक सेक्शन अफसर की जरूरत है।
जनता परेशान, कब सुधरेगी स्थिति
कहने को तो सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर करने के लिए सरकार भारी-भरकम बजट जारी करती है लेकिन हकीकत में पहले भी सरकारी अस्पताल के मरीज अव्यवस्था के शिकार थे और अब भी। भगवान ही जाने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था कब बदलेगी।
-प्रेम कुमार, हल्लोमाजरा
गरीब और जरूरतमंद मरीज अब भी निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। कारण, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का अभाव और कई मुश्किलें हैं। पीजीआई जैसे संस्थान में मरीजों के दबाव की तुलना में मानव संसाधन आधे से भी कम है। व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।
-केशव कुमार, रायपुर खुर्द
इनसेट-
उम्मीदें तमाम पर पूरी होने में लगेगा समय
पीजीआई में 300 बेड का मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर, फिरोजपुर सैटेलाइट सेंटर, संगरूर सैटेलाइट सेंटर, ऊना सैटेलाइट सेंटर के अलावा हिमाचल और पंजाब में स्वीकृत तीन सैटेलाइट सेंटर शामिल हैं। पीजीआई में निर्माणाधीन 300 बेड के एडवांस न्यूरोसाइंस सेंटर की सुविधा 2022-2023 में मिलने लगेगी। वहीं दूसरी तरफ जीएमसीएच-32 में 300 बेड के ट्रॉमा सेंटर और 300 बेड के मदर चाइल्ड केयर सेंटर का भी निर्माण दो से तीन साल के बीच पूरा कर लिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के तहत जीएमएसएच-16 में 300 बेड के मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर का निर्माण भी शीघ्र शुरू होने वाला है लेकिन महामारी के इस दौर में इन योजनाओं को पूरा होने में कितना समय लगेगा कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
पीजीआई में मरीजों का दबाव जानें (2019-2020)
विशिष्ट क्लीनिकों में आए मरीजों की संख्या
- 1233381 मरीज जनरल ओपीडी में आए
- 1480423 मरीज इमरजेंसी ओपीडी में आए
कोट-
पीजीआई में मदर एंड चाइल्ड विंग के साथ न्यूरो साइंस सेंटर का निर्माण जल्द ही पूरा होने जा रहा है। इसके साथ नेहरू एक्सटेंशन में भी गैर कोविड मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। ओपीडी और डाइग्नोसिस में मरीजों को राहत देने के लिए योजना बनाई जा रही है। जल्द ही परिवर्तन दिखाई देगा।

-प्रो. विवेक लाल, निदेशक पीजीआई
कोट-
मरीजों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सेक्टर 48 के अस्पताल को पूर्ण रूप से संचालित किया जा रहा है। जीएमसीएच 32 में 300 बेड के ट्रॉमा सेंटर के निर्माण का कार्य भी प्रगति पर है। उसकी सुविधा शुरू होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32
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