फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   housind board_polt allotation_chandigarh

आखिर कब खत्म होगा अलॉटियों का इंतजार

Thu, 02 Jan 2014 10:30 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 02 Jan 2014 10:30 AM IST
विज्ञापन
housind board_polt allotation_chandigarh
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की सेक्टर-63 की आवासीय योजना के सफल अलॉटियों को किस्त के साथ-साथ हर माह किराया भी देना पड़ रहा है।
विज्ञापन


सीएचबी की ओर से अलॉटियों से पूरा पैसा ले लिया गया है, लेकिन तय समय पर मकान की पजेशन नहीं की गई है। उन्हीं में से एक अलॉटी हैं सेक्टर-37 निवासी सुभाष चंद।

उन्होंने अब चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल से गुहार लगाई है कि जल्द ही उन्हें फ्लैट का पजेशन दिया जाए। उम्मीद है कि 6 जनवरी को प्रशासक के जन सुनवाई सत्र में सुभाष चंद अपनी इस समस्या को पाटिल के समक्ष रखेंगे।
विज्ञापन


सुभाष चंद की तरह ही इस आवासीय योजना के अन्य अलॉटी डेढ़ साल से फ्लैट के पजेशन का इंतजार कर रहे हैं। उनके घरों का बजट बिगड़ गया है क्योंकि वेतन का ज्यादातर हिस्सा किस्त देने और किराया देने में निकल जाता है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

सुभाष चंद ने प्रशासक को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि इन फ्लैटों के ड्रा निकलने के समय यह कहा गया था कि 18 महीने के अंदर फ्लैट का पजेशन दे दिया जाएगा।

अगर सीएचबी निर्धारित समय पर पैसा जमा न करने वालों से जुर्माना वसूलता है तो सीएचबी को भी समय पर फ्लैट का पजेशन न करने पर अलॉटियों को पेनल्टी देनी चाहिए।

उनका कहना है कि वन बीएचके के फ्लैट तैयार हो चुके हैं और सीएचबी को इनका पजेशन दे देना चाहिए। सुभाष का कहना है कि परिवार में वह अकेले कमाने वाले हैं और किराए के साथ-साथ हर महीने बैंक की किस्त भी देनी पड़ रही है। जितनी जल्दी फ्लैट का पजेशन मिलेगा उतनी जल्दी उन्हें किराए देने से राहत मिल जाएगी।

इन फ्लैटों का निर्माण कार्य 22 अप्रैल, 2011 को शुरू हुआ था और इसकी अवधि 18 माह थी। इस हिसाब से यह फ्लैट डेढ़ साल में तैयार हो जाने चाहिए थे। लेकिन, लगभग तीन साल बाद भी फ्लैट तैयार नहीं हैं।

सीएचबी के चेयरमैन सत्यगोपाल ने कहा कि फ्लैट का पजेशन देने में कुछ समय और लगेगा। अभी वहां काम पूरा नहीं हुआ है और कांट्रेक्टर ने उन्हें फ्लैटों को हैंडओवर नहीं किया है।

388 फ्लैटों का निर्माण लटका
इस आवासीय योजना के तहत कुल 2108 फ्लैटों का निर्माण होना है। इनमें से 888 टू बेडरूम, 336 थ्री बेडरूम, 564 वन बेडरूम और 320 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बनाए जाने हैं।

सीएचबी की यह पहली आवासीय योजना है, जो पांच मंजिला है। दो बेडरूम फ्लैटों को तीन वर्गों में बांटा गया था। इसमें 260, 240 और 388 फ्लैट थे। इनमें से 388 फ्लैटों का निर्माण अभी शुरू भी नहीं हुआ है।

हालांकि, दो अन्य वर्गों के फ्लैटों का निर्माण पूरा हो गया है। थ्री बेडरूम फ्लैटों को दो वर्गों में बांटा गया था। इनमें 216 और 120 फ्लैट बनने थे और इनका कार्य अंतिम चरण में है।

इसी तरह वन बेडरूम फ्लैट भी दो वर्गों में बांटे गए हैं। इनका निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है। थ्री बेडरूम फ्लैट की अनुमानित कीमत 39.57 लाख रुपये थी।

इसका कवर्ड एरिया 1424 स्क्वॉयर फुट है, जबकि दो बेडरूम फ्लैट की अनुमानित कीमत 29.14 लाख रुपये थी। वन बेडरूम फ्लैट की अनुमानित कीमत 17.15 लाख रुपये थी।

शुरू से ही विवादों में रही योजना
सीएचबी की यह आवासीय योजना शुरू से ही विवादों में रही है। योजना पंजाब की सीमा पर है। यह सीमा टेढ़ी-मेढ़ी है। इस कारण यहां की जमीन पर पंजाब के लोगों का कब्जा था, जिन्हें हटाने में वहां की सरकार ने असमर्थता जता थी।

इसके बाद सीएचबी को अपनी यह योजना 60 हजार स्क्वॉयर यार्ड की जगह 48 हजार स्क्वॉयर यार्ड में समेटनी पड़ी थी। इसका सबसे ज्यादा असर ईडब्लूएस फ्लैटों की संख्या पर पड़ा।


सीमा पर होने के कारण बाद में भी सीएचबी और गमाडा के बीच कई बार विवाद होता रहा। इस वजह से यह योजना लेट होती गई। गमाडा से सीएचबी का ताजा विवाद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed