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नोटबंदी: अस्पताल ने शव देने के बदले मांगी नई करेंसी, भारी हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Fri, 11 Nov 2016 09:22 AM IST
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बाहर लगी लाइनें
- फोटो : अमर उजाला
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500 व 1000 के नोट बंद होने के कारण वीरवार को महानगर के एक अस्पताल में हंगामा हो गया। अस्पताल पर आरोप है कि शव देने के बदले नई करेंसी की मांग की। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने आरोप को गलत बताया और कहा शव देने से मना नहीं किया गया है।
मामले के अनुसार महानगर के पटेल अस्पताल में किडनी पीड़ित एक मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने शव लेने के लिए जब अस्पताल का हिसाब करना चाहा हो डॉक्टरों ने पुराने 500 व 1000 के नोट लेने से इंकार कर दिया। इस बात को लेकर मृतक के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। मृतक के भाई हरमिदर सिंह ने कहा कि उसका भाई मोहनजीत सिंह किडनी की बीमारी से पीड़ित था। उसे इलाज के लिए पटेल अस्पताल दाखिल करवाया गया था।
इलाज के दौरान वीरवार को भाई की मृत्यु हो गई। हमने जब शव को लेने की बात कही तो अस्पताल वालों ने बिल देने के लिए कहा। जब हमने अस्पताल वालों को 500 व 1000 के पुराने नोट देने चाहे तो उन्होंने पुराने नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। साथ ही मौत का सर्टिफिकेट देने से भी मना कर दिया। इस बारे में स्टाफ इंचार्ज राजेश ने कहा कि शव देने से मना नहीं किया गया है। मृतक के परिजनों को मात्र इतना कहा गया था कि आप कुछ दिन बाद नोट को बदलकर सर्टिफिकेट ले लेना। इस पर मृतक के परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
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मामले के अनुसार महानगर के पटेल अस्पताल में किडनी पीड़ित एक मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने शव लेने के लिए जब अस्पताल का हिसाब करना चाहा हो डॉक्टरों ने पुराने 500 व 1000 के नोट लेने से इंकार कर दिया। इस बात को लेकर मृतक के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। मृतक के भाई हरमिदर सिंह ने कहा कि उसका भाई मोहनजीत सिंह किडनी की बीमारी से पीड़ित था। उसे इलाज के लिए पटेल अस्पताल दाखिल करवाया गया था।
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इलाज के दौरान वीरवार को भाई की मृत्यु हो गई। हमने जब शव को लेने की बात कही तो अस्पताल वालों ने बिल देने के लिए कहा। जब हमने अस्पताल वालों को 500 व 1000 के पुराने नोट देने चाहे तो उन्होंने पुराने नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। साथ ही मौत का सर्टिफिकेट देने से भी मना कर दिया। इस बारे में स्टाफ इंचार्ज राजेश ने कहा कि शव देने से मना नहीं किया गया है। मृतक के परिजनों को मात्र इतना कहा गया था कि आप कुछ दिन बाद नोट को बदलकर सर्टिफिकेट ले लेना। इस पर मृतक के परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
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बैंकों में नोट बदलने को लेकर मारामारी
सुबह सात बजे से बैंकों के बाहर लगी लाइनें
- फोटो : अमर उजाला
बड़े नोट बंद करने के फैसले के बाद वीरवार सुबह बैंकों के बाहर सुबह सात बजे से ही लाइनें लगनी शुरू हो गई। वीरवार सुबह बस्ती जोधेवाल और राहों रोड पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाहर सुबह सात बजे से ही लोग आकर बैठ गए। बस्ती जोधेवाल पीएनबी के बाहर खड़े जोगिंदर सिंह ने कहा कि उनके बच्चे उनसे अलग रहते हैं।
गुजारा करने के लिए दस हजार रुपये थे। सारे पांच सौ और हजार रुपये में थे। वह सुबह सात बजे से ही बैंक के बाहर खड़े हो गए। उनमें से चार हजार रुपये बदलकर मिले और बाकी पैसे उनके खाते में जमा करवा लिए। उन्होंने कहा कि इस काम में उन्हें पांच घंटे लग गए।
चार सौ रुपये की दिहाड़ी छोड़ बदलवाए चार हजार रुपये
बैंक ऑफ इंडिया के बाहर खड़े मलकीत सिंह ने कहा कि वह सुबह चार सौ रुपये की दिहाड़ी छोड़ कर बैंक नोट बदलवाने आए है। पांच घंटे खराब करने के बाद उन्हें चार हजार रुपये के नोट बदलकर मिले हैं।
प्राइवेट बैंकों के पास नहीं पहुंची नई करेंसी
सरकारी बैंक तो चार हजार रुपये बदले दो हजार रुपये के दो नए नोट दे रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों के पास नई करंसी न पहुंचने के कारण वह सौ और बीस के नोट दे रहे थे।
गुजारा करने के लिए दस हजार रुपये थे। सारे पांच सौ और हजार रुपये में थे। वह सुबह सात बजे से ही बैंक के बाहर खड़े हो गए। उनमें से चार हजार रुपये बदलकर मिले और बाकी पैसे उनके खाते में जमा करवा लिए। उन्होंने कहा कि इस काम में उन्हें पांच घंटे लग गए।
चार सौ रुपये की दिहाड़ी छोड़ बदलवाए चार हजार रुपये
बैंक ऑफ इंडिया के बाहर खड़े मलकीत सिंह ने कहा कि वह सुबह चार सौ रुपये की दिहाड़ी छोड़ कर बैंक नोट बदलवाने आए है। पांच घंटे खराब करने के बाद उन्हें चार हजार रुपये के नोट बदलकर मिले हैं।
प्राइवेट बैंकों के पास नहीं पहुंची नई करेंसी
सरकारी बैंक तो चार हजार रुपये बदले दो हजार रुपये के दो नए नोट दे रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों के पास नई करंसी न पहुंचने के कारण वह सौ और बीस के नोट दे रहे थे।