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अलविदा: अर्जुन अवॉर्डी एथलीट हरीचंद का निधन, ओलंपिक में नंगे पांव दौड़ने वाले देश के आखिरी खिलाड़ी थे
Mon, 13 Jun 2022 11:51 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, टांडा उड़मुड़ (होशियारपुर)
संवाद न्यूज एजेंसी, टांडा उड़मुड़ (होशियारपुर)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 13 Jun 2022 11:51 AM IST
सार
एक अप्रैल 1953 को होशियारपुर के गांव घोरेवाल में जन्मे हरि चंद ने 1978 के एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते थे। उन्होंने 1976 और 1980 के ओलंपिक में हिस्सा लिया था।
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ओलंपियन हरि चंद।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले लंबी दूरी के धावक हरि चंद का रविवार रात होशियारपुर जिले के उनके पैतृक गांव घोरेवाहा में निधन हो गया। वह कुछ दिनों से बीमार थे। हरि चंद सीआरपीएफ में लांगरी के पद पर भर्ती हुए और बेहतरीन प्रदर्शन के बूते पर वह कमांडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
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वह पहले और आखिरी ऐसे एथलीट थे, जो ओलंपिक में नंगे पांव दौड़े थे। एक अप्रैल, 1953 को टांडा के गांव घोड़ेवाहा में जन्मे हरि चंद ने गांव के स्कूल में पढ़कर खेल के क्षेत्र में महान मुकाम हासिल किया। 14 जून को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार ग्राम घोड़ेवाहा में किया जाएगा। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भी ट्वीट कर हरी चंद के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है।
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ये हैं उनकी उपलब्धियां
हरी चंद ने बैंकॉक (थाईलैंड) में 1978 एशियाई खेलों में 5,000 मीटर और 10,000 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने सियोल (दक्षिण कोरिया) में 1975 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 10,000 मीटर में स्वर्ण पदक और 5,000 मीटर में कांस्य पदक भी जीता। 1976 के ओलंपिक खेलों में मॉन्ट्रियल (कनाडा) में 10,000 मीटर और मॉस्को (तब सोवियत संघ) में 1980 में मैराथन दौड़ में एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इस बीच 1975 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एथलेटिक्स में डिप्लोमा हासिल करने वाले हरी चंद सीआरपीएफ से कमांडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति होने के बाद भी वे टांडा कॉलेज एथलेटिक सेंटर के मेंटर बने रहे।
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