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Chandigarh News: हार्मोन की गड़बड़ी से हड्डियां कमजोर होंगी न किडनी की पथरी

Sat, 10 Feb 2024 04:04 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Feb 2024 04:04 AM IST
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Hormone imbalance will lead to weak bones and kidney stones.
चंडीगढ़। गर्दन के नीचे थायरॉइड के पीछे स्थित चावल के दाने के आकार की प्राइमरी हाइपो पैराथायरॉइड में गड़बड़ी के कारण अब न तो हड्डियां कमजोर होंगी और न ही किडनी में पथरी होने का खतरा मंडराएगा। पीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने इस समस्या को दूर करने का उपाय तलाश लिया है। इसमें प्राइमरी हाइपो पैराथायरॉइड ग्रंथियों में हाेने वाली गड़बड़ी का पहले से पता लगाकर उसे रोकने का प्रयास किया जा सकेगा। विभाग ने इसकी जांच के लिए एक विशेष किट भी तैयार की है। संस्थान उस किट के पेटेंट की तैयारी में है। इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा के मार्गदर्शन में शोध छात्रा डॉ. गुरजीत कौर ने यह शोध पूरा किया है। इसमें इस मर्ज से ग्रस्त 100 मरीजों पर परीक्षण किया गया। उनमें से 15 प्रतिशत मरीजों में पहले ही समस्या के बारे में जानकारी मिल गई। प्रो. संजय ने बताया कि हाइपरपैराथायरॉइडिज्म तब होता है, जब आपकी पैराथायरॉइड ग्रंथियां रक्तप्रवाह में उच्च मात्रा में पैराथायरॉइड हार्मोन बनाती हैं। ये ग्रंथियां गर्दन के नीचे थायरॉयड के पीछे स्थित होती हैं। हाइपरपैराथायरॉइडिज्म दो प्रकार का होता है। प्राइमरी हाइपरपैराथायरॉइडिज्म में एक या अधिक पैराथायरॉइड ग्रंथियों के बढ़ने से पैराथायरॉइड हार्मोन का अधिक उत्पादन होता है। इससे खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। किडनी में कैल्शियम एकत्र होने से पथरी हो सकती है। प्राथमिक हाइपरपैराथायरॉइडिज्म के लिए सर्जरी सबसे आम उपचार है। इस स्थिति पर काबू के लिए गड़बड़ी वाली ग्रंथि को सर्जरी कर अलग कर दिया जाता है लेकिन सर्जरी के बाद भी अन्य ग्रंथियों में यह समस्या होने का खतरा रहता है। इससे इलाज के दौरान निर्णय लेना कठिन हो जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए ही खून में पाए जाने वाले विशेष मार्कर की तलाश की है। यह मार्कर माइक्रो आरएनए है। मरीज की खून की जांच करने पर यह मार्कर पहले ही बता देगा कि आगे उसे ये समस्या फिर होगी या नहीं। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे का इलाज तय किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार दो से अधिक ग्रंथि भी निकाली जा सकती है।
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इनसेट-
ये लक्षण हैं गंभीर
कमज़ोर हड्डियां जो आसानी से टूट जाती हैं (ऑस्टियोपोरोसिस)
गुर्दे की पथरी

अत्यधिक पेशाब आना

पेट में दर्द

आसानी से थक जाना या कमजोरी होना

अवसाद या भूलने की बीमारी

हड्डी और जोड़ों का दर्द

बिना किसी स्पष्ट कारण के बीमारी की लगातार शिकायतें

मतली, उल्टी या भूख न लगना
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