Chandigarh: हल्लोमाजरा पावर ग्रिड के शुरू होने की जगी आस, शहर को बिजली कट से मिलेगी निजात
बिजली खरीदने के लिए चंडीगढ़ को हर साल 650 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यूटी बिजली विभाग 3.93 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदता है। चंडीगढ़ के पास बिजली उत्पादन का अपना कोई जरिया नहीं है।
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लंबे इंतजार के बाद चंडीगढ़ के हल्लोमाजरा स्थित पावर ग्रिड के शुरू होने की उम्मीद जगी है। पिछले कई वर्षों से बनकर तैयार इस ग्रिड के शुरू होने से चंडीगढ़ को बिजली आपूर्ति का एक अतिरिक्त स्रोत मिल जाएगा। साथ ही शहर में अगले 15 वर्षों तक बिजली की समस्या भी दूर हो जाएगी। गर्मियों में लगने वाले बिजली कट भी खत्म हो जाएंगे।
हाल ही में ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) के सामने हल्लोमाजरा के 220 केवी सब स्टेशन का काम जल्द शुरू करने का मुद्दा उठा था। कहा गया था कि पावर ग्रिड पिछले कई वर्षों से बनकर तैयार है लेकिन कोर्ट केस की वजह से यह शुरू नहीं हो पा रहा। इस पर जेईआरसी ने जवाब मांगा था। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने बताया है कि बरवाला (पंचकूला) से चंडीगढ़ तक 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन जो 220 केवी जीआईएस हल्लोमाजरा को फीड करेगी, वो कई मामलों की वजह से लंबित है। इसके लिए पंजाब सरकार और भारत सरकार के साथ मामला उठाया गया है। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के इस जवाब के बाद जेईआरसी ने काम में तेजी लाने के आदेश दिए थे। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पावर ग्रिड को राहत मिल गई है और जल्द आगे काम शुरू हो सकता है।
पावर ग्रिड के शुरू होने पर चंडीगढ़ के पास होगा बिजली का बैकअप
पावर ग्रिड के शुरू होने के बाद शहरवासियों को काफी राहत मिलेगी। चंडीगढ़ में अभी 220 केवी का एक, 66 केवी के 13 और 33 केवी के पांच सब स्टेशन हैं। मानदंडों के अनुसार, प्रत्येक सब स्टेशन का जीवन काल 25 वर्ष है। चंडीगढ़ में मौजूद कुछ 66 केवी के सब स्टेशनों ने अपना समय पूरा कर लिया है। इसके अलावा जनसंख्या बढ़ने के साथ शहर में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। इस वजह से बिजली के कट लग रहे हैं। पावर ग्रिड के शुरू होने के बाद शहर को 220 केवी का एक सब स्टेशन मिल जाएगा। यह अगले 15 सालों की जरूरत को पूरा करेगा। पावर सप्लाई को बेहतर करने के साथ टी एंड डी लॉस भी कम होगा।
बिजली खरीदने के लिए हर साल खर्च होते हैं 650 करोड़
बिजली खरीदने के लिए चंडीगढ़ को हर साल 650 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यूटी बिजली विभाग 3.93 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदता है। चंडीगढ़ के पास बिजली उत्पादन का अपना कोई जरिया नहीं है। शहर में गर्मियों में रोजाना औसतन 350 से 400 मेगावाट के करीब बिजली की खपत है। बिजली विभाग विभाग केंद्रीय उत्पादन स्टेशनों (सीजीएस) से बिजली खरीदता है। इसमें नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी), नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (एनएचपीसी), न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल), भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) आदि हैं। शहर में 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि अन्य कामर्शियल, स्मॉल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं।
एक नजर में परियोजना
- अगस्त 2014 में मंत्रालय ने दी मंजूरी
- प्रशासन ने हल्लोमाजरा में 3 एकड़ जगह मुहैया कराई
- जुलाई 2017 में शुरू हुआ निर्माण कार्य
- जून 2018 में शुरू होना था पावर ग्रिड
- कोर्ट केस की वजह से काम में हुई देरी
- 150 करोड़ रुपये है कुल लागत