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परमवीर चक्र विजेता की बेटी का सम्मान, शहीद की प्रतिमा का 'अपमान'
दविंदर पाल सिंह/अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
Updated Mon, 24 Oct 2016 10:05 PM IST
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एक ओर बेटी का सम्मान, दूसरी ओर पिता की प्रतिमा का सम्मान
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एक ओर जहां परमवीर चक्र विजेता की बेटी को सम्मानित किया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर उनके शहीद पिता की प्रतिमा का अपमान हो रहा था। मामला सामने आया पंजाब के मोगा में। शहीद सूबेदार परमवीर चक्र विजेता जोगिंदर सिंह के रविवार को शहीदी दिवस पर जिला प्रशासन ने उनकी बेटी कुलवंत कौर को तो सम्मानित किया, लेकिन शहीद की प्रतिमा से मिट्टी झाड़ना तक याद नहीं रहा।
जहां हर साल उनके शहीदी दिवस पर जिला प्रशासन और सेना की ओर से समागम आयोजित किया जाता था। वहीं इस बार कार्यक्रम करवाना भी याद नहीं रहा। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि भारत-पाक सीमा पर अत्याधुनिक पंजाब स्टेट वार हीरोज मेमोरियल और म्यूजियम के राष्ट्र को समर्पित करने के प्रदेश समागम होने की वजह से यह कार्यक्रम नहीं हो पाया।
शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह माहला 15 सितंबर 1941 को सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। उन्होंने 23 अक्तूबर 1962 को कमांड में चीन के दो हमलों में विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया। वहीं तीसरे हमले में उनकी जांघ में गोली लग गई थी। खुद की परवाह किए बिना दुश्मन का डट कर मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। सरकार ने 26 जनवरी 1964 को उन्हें शहीद होने के बाद सर्वोच्च बहादुरी अवार्ड परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
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जहां हर साल उनके शहीदी दिवस पर जिला प्रशासन और सेना की ओर से समागम आयोजित किया जाता था। वहीं इस बार कार्यक्रम करवाना भी याद नहीं रहा। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि भारत-पाक सीमा पर अत्याधुनिक पंजाब स्टेट वार हीरोज मेमोरियल और म्यूजियम के राष्ट्र को समर्पित करने के प्रदेश समागम होने की वजह से यह कार्यक्रम नहीं हो पाया।
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शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह माहला 15 सितंबर 1941 को सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। उन्होंने 23 अक्तूबर 1962 को कमांड में चीन के दो हमलों में विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया। वहीं तीसरे हमले में उनकी जांघ में गोली लग गई थी। खुद की परवाह किए बिना दुश्मन का डट कर मुकाबला करते हुए शहीद हो गए। सरकार ने 26 जनवरी 1964 को उन्हें शहीद होने के बाद सर्वोच्च बहादुरी अवार्ड परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
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कुछ ऐसी थी सूबेदार की बहादुरी की कहानी
एक ओर बेटी का सम्मान, दूसरी ओर पिता की प्रतिमा का सम्मान
शहीद सूबेदार माहला जिला मोगा के गांव माहला कलां के निवासी थे। 11 सितंबर 1997 में शहीद की प्रतिमा को शहर में मुख्य चौक में स्थापित किया गया था। यहां ट्रैफिक लाइट लगने से यह प्रतिमा ज्यूडिशियल कांप्लैक्स में तबदील कर दी गई थी। अब फोरलैन सड़क निर्माण होने से प्रतिमा को जिला सचिवालय में तबदील कर दिया गया है।
उनकी याद में 23 अक्तूबर को हर साल जिला प्रशासन और सेना की ओर से समागम आयोजित किया जाता है। उनकी याद में गांव माहला कलां के उद्यमी नौजवानों ने शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह वाला यूथ क्लब का गठन कर हर साल खेल मेला करवाया जाता है। इसके अलावा यादगारी गेट और पार्क भी हैं। उनकी बेमिसाल बहादुरी और शहादत को प्रणाम कानपुर सैन्य छावनी (उत्तर प्रदेश) में प्रतिमा और अरुणाचल प्रदेश की हिंद-चीन सीमा पर स्मारक बनी हुई है।
वहीं जिला सैनिक भलाई अफसर कर्नल एचएस गिल इस बार भारत-पाक सीमा पर पंजाब स्टेट वार हीरोज मेमोरियल एवं म्यूजियम के प्रदेश समागम होने से यहां समागम नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस बारे में जिला प्रशासन को सूचना पहले ही दे दी गई थी। उन्होंने बताया कि रविवार को हुए समागम में शहीद की बेटी कुलवंत कौर को सम्मानित किया गया है।
उनकी याद में 23 अक्तूबर को हर साल जिला प्रशासन और सेना की ओर से समागम आयोजित किया जाता है। उनकी याद में गांव माहला कलां के उद्यमी नौजवानों ने शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह वाला यूथ क्लब का गठन कर हर साल खेल मेला करवाया जाता है। इसके अलावा यादगारी गेट और पार्क भी हैं। उनकी बेमिसाल बहादुरी और शहादत को प्रणाम कानपुर सैन्य छावनी (उत्तर प्रदेश) में प्रतिमा और अरुणाचल प्रदेश की हिंद-चीन सीमा पर स्मारक बनी हुई है।
वहीं जिला सैनिक भलाई अफसर कर्नल एचएस गिल इस बार भारत-पाक सीमा पर पंजाब स्टेट वार हीरोज मेमोरियल एवं म्यूजियम के प्रदेश समागम होने से यहां समागम नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस बारे में जिला प्रशासन को सूचना पहले ही दे दी गई थी। उन्होंने बताया कि रविवार को हुए समागम में शहीद की बेटी कुलवंत कौर को सम्मानित किया गया है।