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हवालात में हनीप्रीत ने रखा करवा चौथ का व्रत, यूं गुजारा पूरा दिन
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
Updated Mon, 09 Oct 2017 11:39 AM IST
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Honeypreet Insan Arrest
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25 अगस्त को पंचकूला में हुई हिंसा की साजिश में आरोपी हनीप्रीत रविवार पूरे दिन पानी पीकर दीवारों की तरफ ताकती रही। पूछताछ के दौरान जब भी फुर्सत मिली हनीप्रीत अतीत की यादों में चली जा रही थी। करवा चौथ के दिन पूरे दिन हनीप्रीत ने उपवास रखा।
अब तक डेरा में परंपरा रही है कि करवा चौथ के मौके पर वहां रहने वाली अधिकतर साध्वियां और साधु भी अपनी मर्जी से पिता के लिए व्रत रखते हैं। हनीप्रीत ने रिमांड के दौरान व्रत रखा, लेकिन इस दौरान पानी पीती रही।
सूत्रों ने बताया कि सुबह से ही हनीप्रीत से पूछताछ के लिए अलग-अलग महिला अधिकारी पहुंचती रही। लेकिन करवा चौथ का दिन होने की वजह से पुलिस कर्मियों ने भी सामान्य तौर पर पूछताछ की। इस दौरान भी हनीप्रीत से कई बार खाने के लिए पूछा गया, लेकिन वह बार बार मना करती रही।
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अब तक डेरा में परंपरा रही है कि करवा चौथ के मौके पर वहां रहने वाली अधिकतर साध्वियां और साधु भी अपनी मर्जी से पिता के लिए व्रत रखते हैं। हनीप्रीत ने रिमांड के दौरान व्रत रखा, लेकिन इस दौरान पानी पीती रही।
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सूत्रों ने बताया कि सुबह से ही हनीप्रीत से पूछताछ के लिए अलग-अलग महिला अधिकारी पहुंचती रही। लेकिन करवा चौथ का दिन होने की वजह से पुलिस कर्मियों ने भी सामान्य तौर पर पूछताछ की। इस दौरान भी हनीप्रीत से कई बार खाने के लिए पूछा गया, लेकिन वह बार बार मना करती रही।
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राम रहीम की 'लाड़ली' हनीप्रीत
करवा चौथ के दिन रिमांड पर पूछताछ के हर सवाल पर हनीप्रीत को डेरा की तमाम बातें याद आ रही थी। इस दौरान एक-दो बार वह भावुक भी हो गई, जिसे समझाया गया। लेकिन काफी कहने के बाद उसने लिक्विड डाइट लिया। रात में चांद निकलने के बाद उसने व्रत खोला।
डेरे में अब तक चलने वाली परंपरा के तहत वहां न केवल साध्वियां बल्कि पुरुष साधु भी डेरामुखी की खैरियत के लिए व्रत रखते थे। लेकिन पहले आई खबरों की सुर्खियों में डेरा की ओर से साफ किया जा चुका है कि कोई भी अपनी मर्जी से ऐसा करता था और इसके लिए किसी पर दबाव नहीं था।
डेरे में अब तक चलने वाली परंपरा के तहत वहां न केवल साध्वियां बल्कि पुरुष साधु भी डेरामुखी की खैरियत के लिए व्रत रखते थे। लेकिन पहले आई खबरों की सुर्खियों में डेरा की ओर से साफ किया जा चुका है कि कोई भी अपनी मर्जी से ऐसा करता था और इसके लिए किसी पर दबाव नहीं था।