होलिका दहनः 36 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग
इस बार होलिका दहन के दिन दो गुरु आपस में मिल रहे हैं। देवताओं के गुरु बृहस्पति और और राक्षसों के गुरु शुक्र का मिलन हो रहा है। यह कहना है सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र और सुशील कौशल का।
दोनों गुरुओं का मिलन चंडीगढ़ के लिए उल्लास, उमंग और आपसी स्नेह लेकर आएगा। उनके अनुसार यह संयोग 36 साल के बाद बन रहा है। होली शुक्रवार को है। होली के दिन लोग एक दूसरे को रंग अबीर लगाते हैं।
ऐसे करें होलिका दहन: शिव शक्ति मंदिर सेक्टर-30 के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री और श्री राधा कृष्ण मंदिर सेक्टर-18 के पुजारी लाल बहादुर दुबे के अनुसार होलिका जलाने से पहले अग्नि देवता का पंचोपचार पूजा करनी चाहिए। पूजा के उपरांत नारायण का ध्यान कर होलिका दहन करनी चाहिए।
ये होगा होलिका दहन का मुहूर्त
बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि वीरवार को होलिका दहन है। इस दिन प्रदोष काल में भद्रा नहीं है। भद्रा में होलिका दहन निषेध है। शाम को छह बजकर 19 मिनट पर सूर्यास्त है। सूर्यास्त के 45 मिनट तक प्रदोष काल कहा जाता है।
शाम छह बजकर 20 मिनट से शाम सात बजकर चार मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। वीरवार को सुबह 8 बजकर 30 मिनट से पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र शुरू होगा। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। चंडीगढ़ की राशि मीन है। मीन राशि का स्वामी बृहस्पति है। होलिका दहन का दिन वीरवार है।