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होली पर इस बार बन रहा है सर्वार्थसिद्धि योग, लोग ऐसे करें होलिका पूजन, शुभ फल मिलेगा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 09 Mar 2017 09:28 AM IST
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होली का आयोजन
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इस बार होलिका दहन सर्वार्थसिद्धि योग में होगा और दहन में भद्रा भी आड़े नहीं आएगी। पर्व पर बन रहे विशेष संयोग से इस बार होली सभी के लिए लाभदायक है। रंगों के त्यौहार होली को बसंतोत्सव व मदनोत्सव भी कहा जाता है। होलिका दहन के आठ दिन पहले ही होलाष्टक शुरू हो जाता है। इस दौरान समस्त शुभ कार्य को वर्जित माना गया है।
यह कहना है सिद्धांत ज्योतिषाचार्य रवींद्र कुमार मिश्र का। उन्होंने बताया कि विपाशा और इरावती नदी के किनारे के समस्त स्थान सतलुज एवं त्रिपुष्कर नदी के समस्त स्थान पर विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं ऐसी शास्त्राज्ञा है। उन्होंने बताया कि होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक भी समाप्त हो जाता है। होलाष्टक 5 मार्च से प्रारंभ है। जो कि 12 मार्च को समाप्त हो रहा है।
रवींद्र कुमार मिश्र के अनुसार होलिका दहन 12 मार्च को प्रदोष काल में होगा। प्रदोषकाल का समय सूर्यास्त होने के 24 मिनट बाद का होता है। उनका कहना है कि 12 मार्च को सायंकाल 6:50 बजे के बाद होलिका दहन होगा। उन्होंने कहा कि इस दिन चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिन भी है। वहीं होलिका दहन के दूसरे दिन 13 मार्च को रंगों की होली है।
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इस दिन रंगों व अबीर गुलाल का प्रयोग करते हुए होली खेलने की प्राचीन परंपरा है। होली मिलन, मित्रता एवं एकता का पर्व है। इस दिन द्वेषभाव भूलकर सबसे प्रेम और भाईचारे से मिलना चाहिए। एकता सद्भावना एवं स्नेह का परिचय देना चाहिए।
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यह कहना है सिद्धांत ज्योतिषाचार्य रवींद्र कुमार मिश्र का। उन्होंने बताया कि विपाशा और इरावती नदी के किनारे के समस्त स्थान सतलुज एवं त्रिपुष्कर नदी के समस्त स्थान पर विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं ऐसी शास्त्राज्ञा है। उन्होंने बताया कि होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक भी समाप्त हो जाता है। होलाष्टक 5 मार्च से प्रारंभ है। जो कि 12 मार्च को समाप्त हो रहा है।
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रवींद्र कुमार मिश्र के अनुसार होलिका दहन 12 मार्च को प्रदोष काल में होगा। प्रदोषकाल का समय सूर्यास्त होने के 24 मिनट बाद का होता है। उनका कहना है कि 12 मार्च को सायंकाल 6:50 बजे के बाद होलिका दहन होगा। उन्होंने कहा कि इस दिन चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिन भी है। वहीं होलिका दहन के दूसरे दिन 13 मार्च को रंगों की होली है।
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इस दिन रंगों व अबीर गुलाल का प्रयोग करते हुए होली खेलने की प्राचीन परंपरा है। होली मिलन, मित्रता एवं एकता का पर्व है। इस दिन द्वेषभाव भूलकर सबसे प्रेम और भाईचारे से मिलना चाहिए। एकता सद्भावना एवं स्नेह का परिचय देना चाहिए।
व्यापारियों के लिए रहेगी लाभदायक
holi
होली वर्षभर व्यापारियों के लिए भी लाभदायक रहेगी। सरकारी नीतियों से व्यापारियों को उत्तम लाभ मिल सकेगा। जमीन, मकान, बर्तन, आभूषण, मोटर वाहन, खाद्य सामग्री के व्यापार में लाभ प्राप्त होगा। राजनीतिक समस्याओं से सरकार को निजात मिल सकती है। सत्ता पक्ष की स्थिति मजबूत होगी। किसानों के लिए भी होली फलदायी रहेगी। साथ ही बैंकिंग और सर्विस सेक्टर में हो रही परेशानियों का अंत हो सकेगा।
ज्योतिष उपाय से हो सकती हैं मनोकामनाएं पूरी
पंडित जयपुरी के अनुसार शास्त्रों में होली सिद्धरात्रि मानी गई है। इस दिन किए गए प्रयोग से वर्षभर फल प्राप्त होने की संभावना रहती है। दुष्ट शक्ति और दुष्ट प्रवृति से बचने के लिए होली का पर्व ज्योतिष शास्त्र में श्रेष्ठ माना गया है। जातकों को अपनी राशि के अनुसार लकड़ी का एक टुकड़ा होली को अवश्य अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार लकड़ी अर्पण होलिका को सात फेरे लगाकर करने से सालभर परेशानियों से मुक्ति पाई जा सकती है।
मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया
ज्योतिषाचार्य रवींद्र कुमार मिश्र के अनुसार, शास्त्रों में होली को सिद्धरात्रि माना गया है। इस दिन किए गए अनुष्ठान वर्षभर लाभ देते हैं। 5 मार्च से होलाष्टक लग गए हैं। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया। अब रंगों के त्योहारों का उल्लास छाएगा। होली के बाद सूर्य के मीन राशि में होने से एक माह तक विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं हैं। दोबारा वैवाहिक आयोजन 15 अप्रैल से शुरू होंगे। होलाष्टक के दौरान विवाह, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश आदि नहीं होंगे।
ज्योतिष उपाय से हो सकती हैं मनोकामनाएं पूरी
पंडित जयपुरी के अनुसार शास्त्रों में होली सिद्धरात्रि मानी गई है। इस दिन किए गए प्रयोग से वर्षभर फल प्राप्त होने की संभावना रहती है। दुष्ट शक्ति और दुष्ट प्रवृति से बचने के लिए होली का पर्व ज्योतिष शास्त्र में श्रेष्ठ माना गया है। जातकों को अपनी राशि के अनुसार लकड़ी का एक टुकड़ा होली को अवश्य अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार लकड़ी अर्पण होलिका को सात फेरे लगाकर करने से सालभर परेशानियों से मुक्ति पाई जा सकती है।
मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया
ज्योतिषाचार्य रवींद्र कुमार मिश्र के अनुसार, शास्त्रों में होली को सिद्धरात्रि माना गया है। इस दिन किए गए अनुष्ठान वर्षभर लाभ देते हैं। 5 मार्च से होलाष्टक लग गए हैं। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया। अब रंगों के त्योहारों का उल्लास छाएगा। होली के बाद सूर्य के मीन राशि में होने से एक माह तक विवाह के शुभ मुहूर्त नहीं हैं। दोबारा वैवाहिक आयोजन 15 अप्रैल से शुरू होंगे। होलाष्टक के दौरान विवाह, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश आदि नहीं होंगे।
किस राशि के जातक कौनसी लकड़ी करें अर्पित
holi
राशि लकड़ी
मेष खेर
वृष गुलर
मिथुन अपामार्ग
कर्क पलास
सिंह मदार
कन्या अपामार्ग
तुला गुलर
वृश्चिक खदिर
धनु पीपल
मकर शमी
कुंभ पीपल
मीन पलास
मेष खेर
वृष गुलर
मिथुन अपामार्ग
कर्क पलास
सिंह मदार
कन्या अपामार्ग
तुला गुलर
वृश्चिक खदिर
धनु पीपल
मकर शमी
कुंभ पीपल
मीन पलास