‘अंकल सरकार कहती है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, क्या मैं बेटी नहीं हूं’
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ये टीस उस बेटी की है, जिसने छह माह पहले ही अपनी मां को खो दिया। पिता जय सिंह एचएमटी में पिछले करीब 23 वर्षों से कार्यरत हैं। उनकी दो बेटियां हैं। रेनू बीएससी द्वितीय वर्ष और छोटी बेटी नेहा 12 वीं की छात्रा। दोनों बेटियां पिता की आर्थिक परेशानी को भली प्रकार समझती हैं।
इनका कहना है कि कठिनाई के इस दौर में वह अपना गुजरा कैसे कर रही है वह ही जानती हैं। जब नेहा से बात की तो उसने बताया कि बेहतर इलाज न मिलने के कारण उसकी मां स्वर्ग सिधार गईं।
पिता के हाथ में पैसा न होने की वजह से मां का अच्छा इलाज नहीं हो सका। पिता ने एचएमटी में इलाज के लिए डिमांड भेजी थी, लेकिन इलाज के लिए पैसा मंजूर नहीं हो सका। बता दें कि नेहा की माता मां संतोष देवी की 8 अक्तूबर 2015 को इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
नेहा की मानें तो उसकी मां की मौत का कारण कोई रोग नहीं, बल्कि एचएमटी से कोई सहयोग न मिलना था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार को नहीं पता कि ऐेसे हालातों में बेटियों का पालन पोषण और उनकी पढ़ाई कैसे होगी।
उल्लेखनीय है कि छह माह पहले संतोष देवी की मौत की तरह दो दिन पहले ही एचएमटी वर्कर धर्मपाल की मौत भी ऐसे ही हालात में हुई थी। फिलहाल लाचार सरकार से आस लगाए बैठे हैं कि उनकी सैलरी कब रिलीज होगी और एचएमटी को जिंदा रखने के लिए केंद्र सरकार से कैसे आक्सीजन मिलेगी।