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रोहतक रेपकांड: ऐतिहासिक फैसला, सातों को फांसी

Tue, 22 Dec 2015 01:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Updated Tue, 22 Dec 2015 01:12 PM IST
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historical court decision in three months in rohtak rape case

रोहतक रेपकांड में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मात्र तीन माह में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 8 में से 7 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। ये ऐतिहासिक फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत ने सुनाया।

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इससे पहले कोर्ट ने 18 दिसंबर को दिए फैसले में सातों आरोपियों को पुलिस चालान में शामिल सभी धाराओं में दोषी माना था। कोर्ट ने दोषियों में शामिल नाबालिग राजेश उर्फ घूचडू को छह धाराओं सहित आईपीसी की धारा 377 में भी दोषी माना है।
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पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि नाबालिग राजेश उर्फ घूचडु वही दोषी है जिसने युवती से सबसे ज्यादा दरिंदगी की थी।

इन धाराओं में सभी आरोपी पाए गए दोषी

सभी सातों आरोपी पवन, प्रमोद उर्फ पदम, सरवर उर्फ बिल्लू, मनबीर उर्फ मन्नी, सुनील उर्फ मिढ़ा, सुनील उर्फ शीला और राजेश उर्फ घुचडू को आईपीसी की करीब 7 धाराओं में दोषी माना गया।
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इनमें आईपीसी की धारा 376डी ‘गैंगरेप’ 302 ‘हत्या’ 364 ‘अपहरण’ 201 ‘सबूत खुर्द-बुर्द करना’ 120बी ‘साजिश रचना’ और 149 ‘5 या 5 से अधिक लोगों का वारदात स्थल पर इकट्ठा होना’ शामिल है। वहीं, दोषियों में शामिल नाबालिग राजेश उर्फ घुचडू को 377 ‘अप्राकृतिक यौन संबंध’ में भी दोषी करार दिया गया है।

ये है मामला

historical court decision in three months in rohtak rape case

रोहतक की एक नेपाली युवती एक फरवरी 2015 को घर से गायब हो गई थी। चार फरवरी को नग्न अवस्था में उसका शव बहुअकबरपुर गांव के खेतों में मिला था। देर शाम को युवती की पहचान हुई। मूलरूप से वह नेपाल की थी और एक फरवरी को घर से चली गई थी। वह मानसिक विकलांग थी।

पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम के दौरान खुलासा हुआ कि युवती से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था और उसके बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया था। बाद में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था जबकि एक आरोपी ने दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी।

आरोपियों में एक नाबालिग नेपाली युवक भी शामिल था। इसका मामला किशोर न्यायालय में चल रहा है। रोहतक कोर्ट में 9 सितंबर 2015 को सभी आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए गए थे। 15 अक्तूबर से गवाही का दौर शुरू हुआ था। अक्तूबर माह में गवाही के लिए 9 दिन निर्धारित किए गए थे। इस दौरान कुल 57 लोगों की गवाही हुई जबकि आरोपी पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए था।

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