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Hindi News ›   Chandigarh ›   Hindi readers are more, yet the ghost of English is on the mind

हिंदी पढ़ने वाले अधिक, फिर भी दिमाग पर अंग्रेजी का भूत सवार

Fri, 24 Sep 2021 02:20 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 24 Sep 2021 02:20 AM IST
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Hindi readers are more, yet the ghost of English is on the mind
चंडीगढ़। आधे से ज्यादा देश हिंदी बोलने, समझने के साथ पढ़ना भी जानता है, लेकिन हमारे दिल-दिमाग पर अंग्रेजी का फितूर सवार है। असल में हमने खुद को भाषाई वर्गों में बांट लिया है। हम एक भाषा को श्रेष्ठ और दूसरे को निम्न समझते हैं, जो कि हमारी समस्या है। ये बातें लेखिका, कवयित्री और शोधकर्ता राजवंती मान ने अमर उजाला के साथ साझा कीं।
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उन्होंने कहा कि लेखक अपने क्षेत्र की भाषा में लिखता है, जिससे वहां के लोगों को उनके इतिहास और संस्कृति की जानकारी मिल सके। यह अच्छी बात कि आम लोगों को उनकी भाषा में लिखकर ही पढ़ाना होगा, तभी लोग अपने क्षेत्र के साहित्य से खुद को जोड़ पाएंगे। इससे हिंदी का विकास भी होगा।
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लेखिका राजवंती हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी शोध आधारित किताबें प्रकाशित करवा चुकी हैं। उनकी ओर से हिंदी में तीन काव्य संग्रह, एक यात्रा वृत्तांत और हिंदी व अंग्रेजी दोनों में सात अन्य किताबें लिखी गई है, जो शोध आधारित हैं। पिछले दिनों लेखिका की ओर से एक यात्रा वृत्तांत ‘थेमस तरल इतिहास है’, कविता संग्रह ‘हदें टूटना जरूरी है’ और शोध आधारित किताब ‘हरफूल जाट जूलानीवाला’ लिखी गई है।
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