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Chandigarh News: हिंदी हमारी भाषा ही नहीं, हमारी पहचान और आत्मसम्मान है

Mon, 14 Sep 2026 02:17 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 02:17 AM IST
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Hindi is not just our language; it is our identity and self-respect.

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हिंदी केवल हमारी भाषा नहीं, हमारी पहचान और हमारी संवेदना है। यह ऐसी भाषा है जिसने समय के साथ स्वयं को निरंतर समृद्ध किया है और बदलते युग की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी स्वीकार्यता को और व्यापक बनाया है। आज हिंदी भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया के कई देशों में करोड़ों लोगों के बीच संवाद और अभिव्यक्ति का माध्यम बन रही है।
हिंदी सिनेमा, धारावाहिकों, साहित्य, संगीत और डिजिटल माध्यमों ने हिंदी को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिंदी फिल्मों और धारावाहिकों के संवाद, गीत और कहानियां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों तक पहुंच रही हैं। यह हिंदी की जीवंतता और उसकी व्यापक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
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हमें हिंदी को लेकर किसी भी प्रकार की हीनभावना या कुंठा रखने की आवश्यकता नहीं है। जिस भाषा में हम सोचते हैं, अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं और अपने रिश्तों को जीते हैं, उस भाषा के प्रति सम्मान हमारे आत्मसम्मान का भी हिस्सा है। हम अपनी भाषा को जितना प्यार और सम्मान देंगे, वह उतनी ही अधिक फलेगी-फूलेगी और आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंचेगी।
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुनिया के कई बड़े और महत्वपूर्ण मंचों पर हिंदी में संवाद करके यह संदेश दिया है कि अपनी भाषा में बात करना आत्मविश्वास और गौरव का विषय है। वैश्विक मंचों पर हिंदी की उपस्थिति ने दुनिया का ध्यान भारत की भाषा, संस्कृति और विविधता की ओर आकर्षित किया है।
अब हिंदी को आगे ले जाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारे बच्चों और युवाओं की है। हमें उनके भीतर यह विश्वास पैदा करना होगा कि हिंदी आधुनिकता के रास्ते में बाधा नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक शक्ति है। दूसरी भाषाएं सीखना ज्ञान का विस्तार है लेकिन अपनी भाषा से जुड़ना अपनी जड़ों से जुड़े रहना है।
हिंदी को केवल विशेष अवसरों तक सीमित न रखें। इसे अपने घर, परिवार और दैनिक जीवन की बातचीत का सहज हिस्सा बनाएं। बच्चों से हिंदी में संवाद करें, हिंदी की किताबें पढ़ें, हिंदी साहित्य और सिनेमा से जुड़ें और डिजिटल दुनिया में भी हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें।

भाषा तभी जीवित और समृद्ध रहती है जब वह लोगों के जीवन का हिस्सा बनी रहे। आइए, हिंदी को केवल बोलने की भाषा नहीं बल्कि गर्व, आत्मविश्वास और अपनी सांस्कृतिक विरासत की भाषा बनाएं। यही हमारी जिम्मेदारी भी है और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी।

गुलाब चंद कटारिया
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक
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