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हिंदी हैं हमः पत्थरों के इस शहर में पत्थर न हो जाऊं, चल जिंदगी अब घर लौट चलें...पढ़ें रचनाएं
Tue, 08 Sep 2020 01:24 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 08 Sep 2020 01:24 PM IST
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हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
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अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के प्रति पाठकों में गजब का उत्साह है। रोजाना कई लोग अपनी रचनाएं ई-मेल से हमें भेज रहे हैं। कोई कविता भेज रहा है तो कोई लेख। इनमें कुछ ऐसी हैं, जो दिल को छू जाती हैं। इसके बावजूद हमारी कोशिश है कि जिन पाठकों ने शब्द सीमा के दायरे में अपनी रचनाएं भेजी हैं, वे सभी प्रकाशित हो जाएं। उन पाठकों से निवेदन है कि जिनकी रचनाएं एक बार प्रकाशित हो चुकी हैं, वह दोबारा न भेजें। पाठकों की रचनाएं 14 सितंबर तक प्रकाशित होंगी।
बचपन की यादें
बचपन का समय भी कितना अच्छा होता है। न काम की चिंता न घर की। जितना दिल चाहे, उतना खेलो। न जल्दी उठने की जरूरत। कितना अच्छा होता है बचपन। अब बड़े हो गए। उतनी ज्यादा जिम्मेदारी बढ़ गईं। अब जल्दी उठना है। न सोने का समय है और न ही जागने का। बस काम ही काम। अब बचपन याद आता है। बस यादें रह गईं बचपन की।
- शिल्पा, गृहिणी
मेहनत
मेहनत करना इंसान की एक ऐसी विशेषता है, जो उसको धरती से उठाकर आसमान तक पहुंचाने की काबलियत रखती है। अगर इंसान में सच्ची लगन हो कोई भी काम करने की तो वो कहीं भी, कभी भी, किसी भी हालत में कुछ भी हासिल कर सकता है। जैसे-कमजोर विद्यार्थी परिश्रम करके सफलता हासिल कर सकता है। गरीब अपनी मेहनत से अमीर बन सकता है। रोगी हर रोज व्यायाम कर निरोगी बन सकता है। इसलिए मेहनती मनुष्य अपने परिवार के लिए हीरा होता है। यह एक ऐसा आभूषण है, जिसे न तो कोई चुरा सकता है और न ही कभी कम हो सकता है।
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- कृतिका, अध्यापिका बलटाना
गुरु की महिमा
गुरु का जीवन में होना विशेष मायने रखता है। गुरु के बिना हमारा जीवन अंधकारमय होता है। वह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हमें जीवन जीने का रास्ता दिखाते हैं। एक बालक के प्रथम गुरु उसके माता-पिता होते हैं। गुरु की तुलना हम ईश्वर के साथ करते हैं। वह हमें सही मार्ग दिखाकर हमारा मार्ग दर्शन करते हैं। हमें हमेशा अपने गुरु का आदर करना चाहिए।
- मुस्कान बिष्ट, विद्यार्थी सेक्टर 14
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बचपन की यादें
बचपन का समय भी कितना अच्छा होता है। न काम की चिंता न घर की। जितना दिल चाहे, उतना खेलो। न जल्दी उठने की जरूरत। कितना अच्छा होता है बचपन। अब बड़े हो गए। उतनी ज्यादा जिम्मेदारी बढ़ गईं। अब जल्दी उठना है। न सोने का समय है और न ही जागने का। बस काम ही काम। अब बचपन याद आता है। बस यादें रह गईं बचपन की।
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- शिल्पा, गृहिणी
मेहनत
मेहनत करना इंसान की एक ऐसी विशेषता है, जो उसको धरती से उठाकर आसमान तक पहुंचाने की काबलियत रखती है। अगर इंसान में सच्ची लगन हो कोई भी काम करने की तो वो कहीं भी, कभी भी, किसी भी हालत में कुछ भी हासिल कर सकता है। जैसे-कमजोर विद्यार्थी परिश्रम करके सफलता हासिल कर सकता है। गरीब अपनी मेहनत से अमीर बन सकता है। रोगी हर रोज व्यायाम कर निरोगी बन सकता है। इसलिए मेहनती मनुष्य अपने परिवार के लिए हीरा होता है। यह एक ऐसा आभूषण है, जिसे न तो कोई चुरा सकता है और न ही कभी कम हो सकता है।
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- कृतिका, अध्यापिका बलटाना
गुरु की महिमा
गुरु का जीवन में होना विशेष मायने रखता है। गुरु के बिना हमारा जीवन अंधकारमय होता है। वह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हमें जीवन जीने का रास्ता दिखाते हैं। एक बालक के प्रथम गुरु उसके माता-पिता होते हैं। गुरु की तुलना हम ईश्वर के साथ करते हैं। वह हमें सही मार्ग दिखाकर हमारा मार्ग दर्शन करते हैं। हमें हमेशा अपने गुरु का आदर करना चाहिए।
- मुस्कान बिष्ट, विद्यार्थी सेक्टर 14
शिक्षक समाज के निर्माता होते हैं
शिक्षक समाज के निर्माता होते हैं, शिक्षक संस्कारों के ज्ञाता होते हैं,
प्यार से ,डांट से या कभी इंकार से, शिष्य के लिए कठोर निर्णय लेते हैं
शिक्षक शिष्य के लिए वरदान ही होते हैं
शिक्षक वह पारखी होते हैं जो हर हीरे की परख करते हैं
अपने शिष्यों में सदैव प्रेरणा भरते हैं, शिक्षा की अग्नि से जीवन को पक्का करते हैं
आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रेरित करते हैं, नैतिक मूल्यों से देश के भविष्य को संवारते हैं
विभिन्न संस्कारों से भावी पीढ़ी का जीवन सुधारते हैं
शिक्षक शिष्य के लिए वरदान ही होते हैं
आज के संकट के परिवेश में
हमारे अध्यापकों ने अध्ययन को जारी रखा है
हमारे आत्मविश्वास को संभाले रखा है
सब अध्यापकों को शत शत नमन
- दीपांशी गौतम, सेक्टर-10 पंचकूला
प्यार से ,डांट से या कभी इंकार से, शिष्य के लिए कठोर निर्णय लेते हैं
शिक्षक शिष्य के लिए वरदान ही होते हैं
शिक्षक वह पारखी होते हैं जो हर हीरे की परख करते हैं
अपने शिष्यों में सदैव प्रेरणा भरते हैं, शिक्षा की अग्नि से जीवन को पक्का करते हैं
आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रेरित करते हैं, नैतिक मूल्यों से देश के भविष्य को संवारते हैं
विभिन्न संस्कारों से भावी पीढ़ी का जीवन सुधारते हैं
शिक्षक शिष्य के लिए वरदान ही होते हैं
आज के संकट के परिवेश में
हमारे अध्यापकों ने अध्ययन को जारी रखा है
हमारे आत्मविश्वास को संभाले रखा है
सब अध्यापकों को शत शत नमन
- दीपांशी गौतम, सेक्टर-10 पंचकूला
कोविड में विद्या-दान
कोविड ने किया हम सबको परेशान
स्कूल, गलियां सब हो गए वीरान
इन हालातों से थे हम सब अनजान
तब ई-लर्निंग बनी वरदान
टीचर्स फिर साबित हुईं महान
कंप्यूटर सीख, बढ़ाया अपना मान-सम्मान
दिया हम बच्चों को घर पर ही, विद्या दान
हम जताते हैं अपना आभार
प्यारे अध्यापकों आपको शत शत प्रणाम
- एकता, शिक्षिका चंडीगढ़
स्कूल, गलियां सब हो गए वीरान
इन हालातों से थे हम सब अनजान
तब ई-लर्निंग बनी वरदान
टीचर्स फिर साबित हुईं महान
कंप्यूटर सीख, बढ़ाया अपना मान-सम्मान
दिया हम बच्चों को घर पर ही, विद्या दान
हम जताते हैं अपना आभार
प्यारे अध्यापकों आपको शत शत प्रणाम
- एकता, शिक्षिका चंडीगढ़
चल जिंदगी अब घर लौट चलें
खत्म हुए यहां रहने के सिलसिले
बरसों बीत गए अपनों से मिले
रिश्तों में यहां गरमाहट नहीं है
किसी अपने के यहां आने की आहट नहीं है
अपनों से खाली है शहर, जिंदगी क्यों गई आकर यहां ठहर
बुजुर्ग यहां अकेले बिन मौत हैं मर जाते
बच्चे विदेशी धरा पर जाकर हैं इतराते
मेरे गांव में तो नहीं है कुछ ऐसा
कोई नहीं गर नहीं है बहुत पैसा
पत्थरों के इस शहर में पत्थर न हो जाऊं
चल जिंदगी अब घर लौट चलें
खत्म हुए यहां रहने के सिलसिले
- रमाकांत शर्मा, सेक्टर 37बी चंडीगढ़
बरसों बीत गए अपनों से मिले
रिश्तों में यहां गरमाहट नहीं है
किसी अपने के यहां आने की आहट नहीं है
अपनों से खाली है शहर, जिंदगी क्यों गई आकर यहां ठहर
बुजुर्ग यहां अकेले बिन मौत हैं मर जाते
बच्चे विदेशी धरा पर जाकर हैं इतराते
मेरे गांव में तो नहीं है कुछ ऐसा
कोई नहीं गर नहीं है बहुत पैसा
पत्थरों के इस शहर में पत्थर न हो जाऊं
चल जिंदगी अब घर लौट चलें
खत्म हुए यहां रहने के सिलसिले
- रमाकांत शर्मा, सेक्टर 37बी चंडीगढ़