हिमाचल प्रदेश्ा के सिरमौर बने डॉ. देवव्रत की पहली प्रतिक्रिया
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हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने कहा कि देवभूमि का समुचित विकास उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि मैं एक शिक्षक हूं और जिस प्रकार कुरुक्षेत्र के गुरुकुल को पहचान मिली है, उसी तरह का प्रयास रहेगा कि हिमाचल प्रदेश का नाम विश्वपटल पर हो। शिक्षा, पर्यटन और देवभूमि की मूलभूत विकास को लेकर वे सभी के साथ मिलकर कार्य करेंगे।
राज्यपाल बनने के बाद भी जारी रहेगा शिक्षा का कार्य
हिमाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने कहा कि पिछले लगभग 35 साल से उन्होंने गुरुकुल कुरुक्षेत्र में हजारों छात्रों को सुशिक्षित और सुसंस्कारित कर देश-सेवा के लिए समर्पित किया है, आगे भी यह उत्तम और पुनीत कार्य जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वे मूल रूप से शिक्षक हैं और शिक्षा से ही उन्हें आज ये सम्मान मिला है।
मैं जानता हूं हिमाचल प्रदेश को नजदीक से
नवनियुक्त राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वे काफी नजदीक से जानते हैं। उनका वहां आना जाना लगा रहा है। वहां के लोगों की मूलभूत जरूरतों और समस्याओं से वे काफी हद तक वाकिफ है। उनकी प्राथमिकताओं में वहां का समुचित विकास शामिल होगा। वह सभी को साथ लेकर कार्य करेंगे।
हमेशा गुरुकुल से जुड़े रहेंगे
राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी एवं भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उन्हें ऐसी कोई जिम्मेवारी सौपेंगे। अपनी नियुक्ति पर उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एवं योगगुरु बाबा रामदेव का आभार जताया है।
उनका कहना है कि योगगुरु बाबा रामदेव उनके प्रेरणा-स्त्रोत हैं और देश की उन्नति और विकास के लिए जो प्रयास वे कर रहें है, वह सराहनीय हैं। राज्यपाल बनने के बाद गुरुकुल को छोड़ने के सवाल पर डॉ. देवव्रत आचार्य ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र उनका अपना परिवार है और यहां का प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी, छात्र उनके परिवार के सदस्य हैं।
आज गुरुकुल विश्व-स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुका है और भविष्य में इससे भी अधिक गति से उन्नति करेगा। जहां तक सवाल गुरुकुल को छोड़ने का है तो, वे गुरुकुल से हमेशा जुड़े रहेंगे।
किसी ने फोन पर दी मुझे जानकारी
आचार्य देवव्रत ने अपनी नियुक्ति पर हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि उन्हें गवर्नर बनाया गया है। उन्होंने बताया कि वे तो किसी कार्यवश यमुनानगर गए हुए थे और वहां से दोपहर बाद पहुंचे तो पानीपत से किसी ने फोन पर जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि फोन करने वाले ने बताया कि टीवी चलाकर देखो। जब टीवी पर देखा तो वहां चल रहा था। इसके बाद बस लगातार बधाइयों के फोन आने लगे।
दो दिन पहले आया था राष्ट्रपति भवन से फोन
आचार्य देवव्रत के काफी नजदीकी रहे गुरुकुल प्रबंधक समिति के अध्यक्ष कुलवंत सैनी ने बताया कि दो दिन पूर्व वे आचार्य के साथ बैठे थे, उस समय राष्ट्रपति भवन से फोन आया था।
फोन करने वालों ने आचार्य देवव्रत के नाम की स्पेलिंग पूछी थी और उसके बाद उन्होंने फोन काट दिया था। किसी को भी नहीं पता था कि आचार्य को गवर्नर बनाया जा रहा है, लेकिन ये जरूर तय था कि कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने वाली है।