Farmer Protest : उच्च शिक्षा हासिल कर इन किसानों ने चुनी खेती की राह, कृषि कानूनों की खामियां समझ विरोध में डटे
सिंघू बार्डर पर डटे ये पोस्ट ग्रेजुएट, इंजीनियरिंग, पीएचडी करके खेती चुनने वाले किसान कहते हैं कि कृषि कानूनों में एमएसपी व मंडी सिस्टम लागू रहने की कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में कारपोरेट सिस्टम पूरी तरह से लागू हो जाएगा। किसान तब तक यहां से नहीं हटेंगे, जब तक कृषि कानून रद्द नहीं हो जाते।
मैंने एमए तक पढ़ाई की है। पहले नौकरी करने का विचार था, लेकिन उम्मीद के अनुसार नौकरी नहीं मिली। इस पर खेती करनी शुरू कर दी और परिवार का गुजारा अच्छे से चल रहा था। अब कृषि कानूनों के कारण खेती खत्म होती दिख रही है। अपनी खेती बचाने को आंदोलन से जुड़े हैं। - गुरदयाल सिंह, पटियाला
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मैं ग्रेजुएट हूं। पहले पढ़ाई करके सोचा कि नौकरी करेंगे, लेकिन अपनी खेती करने लगे। पिछले चार साल से खेती कर रहे हैं तो अब हालात देखकर लग रहा है कि खेती से आगे परिवार का पेट भी नहीं भर सकेंगे। पहले ही फसलों से मुनाफा नहीं था अब नुकसान उठाने की नौबत आ गई है। - मंजीत सिंह, पटियाला
नौकरी मिली नहीं, अब सरकार खेती भी छीन रही है
पटियाला के किसान जगमिंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने इंजीनियरिंग की है, लेकिन हमारे यहां नौकरी ही नहीं है। इसलिए खेती करते हैं, जिससे परिवार का गुजारा हो जाता है। इतना पढ़कर खेती करनी पड़ रही थी और अब यह खेती भी सरकार छीन रही है। जिस तरह के कृषि कानून बनाए गए हैं, उनका हमें कोई फायदा नहीं होगा।एमए करके भी नौकरी नहीं मिली तो खेती कर रहा हूं। मेरे कई साथी पीएचडी किए हुए हैं, लेकिन वह भी खेती कर रहे हैं। खेती ही हमारा सब कुछ है और अब इसे भी सरकार छीन रही है। इसलिए कृषि कानूनों को रद्द करना चाहिए और इसके लिए हम हर तरह की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। - सुखचैन सिंह, पटियाला।