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हरियाणा में 'चाइल्ड केयर लीव' के लिए नियमावली जारी, फरमान- नए सिरे से दी जाएगी पोस्टिंग

Wed, 25 Dec 2019 10:49 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 25 Dec 2019 10:49 AM IST
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Higher Education Department Haryana Released Circular Regarding Child Care Leave to Professors
फाइल फोटो
कॉलेज की महिला प्रोफेसर को चाइल्ड केयर लीव देने को लेकर एक नियमावली जारी की गई है, जिसके मुताबिक लीव से लौटने के बाद नए सिरे से पोस्टिंग दी जाएगी। हरियाणा उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने इससे संबंधित सर्कुलर राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्य को जारी किया है।
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विभाग के डिप्टी डायरेक्टर द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पढ़ाने वाली महिला प्रोफेसर अगर एक महीने से ज्यादा अवधि के लिए ‘चाइल्ड केयर लीव’ लेती हैं, तो लीव पूरी होने के बाद उनको पंचकूला निदेशालय में ज्वॉइन करना होगा। फिर उनको नए सिरे से पोस्टिंग दी जाएगी।
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यही नहीं उन प्रोफेसर का पद ‘चाइल्ड केयर लीव’ के दौरान स्थानांतरण व प्रतिनियुक्ति के लिए रिक्त भी माना जाएगा। हरियाणा सरकार ने सिविल सेवाएं (लीव) नियम, 2016 में परिकल्पित प्रावधान के अनुरूप 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिग बच्चे वाली सरकारी महिला कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के दौरान 730 दिनों की अधिकतम अवधि के लिए चाइल्ड केयर लीव दी जा सकती है।
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चाहे लीव बच्चों के पालन-पोषण के लिए हो या उनकी परीक्षा या बीमारी में देखभाल की जरूरत आदि से संबंधित हो।

महिला प्रोफेसरों की जरूरत और विद्यार्थियों की शिक्षा के बीच संतुलन जरूरी

सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि कॉलेज में महिला प्रोफेसरों के बच्चों की जरूरतों और संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है। चाइल्ड केयर लीव ‘उनका अधिकार’ कहकर नहीं ली जानी चाहिए और किसी भी परिस्थिति में सक्षम अधिकारी द्वारा चाइल्ड केयर लीव मंजूर किए बिना उस मामले को आगे भी नहीं भेजना चाहिए।

सरकारी महिला प्रोफेसरों को जरूरत के समय अपने बच्चों की देखभाल के लिए चाइल्ड केयर लीव की अनुमति दी तो जाएगी, लेकिन इतना ध्यान अवश्य रखना होगा कि उस लीव से कार्यालय, संस्थान, कॉलेज आदि का कामकाज बाधित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की छुट्टी का लाभ एक वर्ष में केवल एक बार ही लिया जा सकता है।

छुट्टी की अवधि न्यूनतम एक महीना होगी और एक महीना से अधिक के मामले में इसे एक अवधि वार्षिक व सेमेस्टर यानी ब्रेक में साढ़े चार महीने (135 दिन) के लिए मंजूरी दी जाएगी। आवेदक प्रोफेसर निर्धारित प्रोफार्मा में कम से कम दो महीने पहले ‘चाइल्ड केयर लीव’ के लिए आवेदन करेगा।

किसी भी महिला एसोसिएट व सहायक प्रोफेसर के ‘चाइल्ड केयर लीव’ आवेदन पर प्रिंसिपल को सात दिनों के भीतर ही प्रक्रिया पूरी करके निदेशालय को भिजवाना होगा। साथ ही लीव लेने वाली प्रोफेसर की जगह पढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करके समय सारणी और पाठ योजना और अवकाश के लिए कारण का प्रमाण भेजना होगा। 

यदि ‘चाइल्ड केयर लीव’ एक महीने से अधिक है तो महिला एसोसिएट व सहायक प्रोफेसर को ‘चाइल्ड केयर लीव’ का लाभ उठाने के बाद पंचकूला स्थित निदेशालय में ज्वॉइन करना होगा और बाद में उसे नई पोस्टिंग दी जाएगी। ‘चाइल्ड केयर लीव’ के दौरान उस कर्मचारी का पद स्थानांतरण व प्रतिनियुक्ति के लिए रिक्त माना जाएगा।
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