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स्मार्ट सिटी में गंदगी पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने प्रशासन से मांगा जवाब

Sun, 23 Apr 2017 09:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 23 Apr 2017 09:38 AM IST
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highcourt Responding to the municipal corporation on rising roads on smart city
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
स्मार्ट सिटी बनने की राह पर चलते हुए चंडीगढ़ के सामने अभी बहुत सारी चुनौतियां हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ ऐसे अहम मुद्दे उठाएं हैं जिसने चंडीगढ़ प्रशासन को आइना दिखा दिया है। हाईकोर्ट ने इन सभी मुद्दों को सवालों का रूप देते हुए चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम से अगली सुनवाई पर जवाब तलब किया है।
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पंचकूला में गंदगी और सीवर को लेकर एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उस मामले में चंडीगढ़ को भी शामिल कर लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ में भी ऐसे कई अहम मुद्दे हैं जिनपर गंभीरता से गौर करने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने कहा कि जगह-जगह सड़कों के किनारे वृक्षों की डालियां स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी में बाधक बन रही हैं।
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पर्याप्त रोशनी न होने के कारण वाहन चालकों को हाई बीम का इस्तेमाल करना पड़ता है, जो प्रतिबंधित है और हादसों का कारण भी बनता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने नगर निगम को इस मामले में कार्रवाई कर अगली सुनवाई पर इसकी जानकारी सौंपने के आदेश दिए हैं। 
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रोक के बाद भी पलास्टिक बैग कैसे?

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
लाइट्स के बाद हाईकोर्ट ने दूसरा मुद्दा शहर में प्लास्टिक बैग्स को लेकर उठाया। अदालत ने कहा कि इस पर पाबंदी है इसके बावजूद आम तौर पर इन्हें देखा जा रहा है। इस पाबंदी को सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा है, जिस कारण यह पर्यावरण के लिए खतरा बन रहे हैं। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर निगम को यह बताने के आदेश दिए हैं कि पॉलीथिन बैन को सख्ती से लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

 शहर की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था और गंदगी के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने कहा कि यहां सिर्फ धार्मिक स्थलों के पास ही लंगर या छबील लगाने की इजाजत दी जानी चाहिए। अन्य मेन रोड्स पर इसकी इजाजत देने से ट्रैफिक व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा हो जाती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि कहीं भी छबील या लंगर लगाए जाने से पेपर प्लेट्स और कप फैला दिए जाते हैं। इससे गंदगी बढ़ती है और बीमारियों का खतरा भी रहता है। इसके साथ ही सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक बाधित होने की होती है। हाईकोर्ट द्वारा उठाए गए इन सवालों पर 15 मई को यूटी प्रशासन और नगर निगम को अपना जवाब सौंपना होगा। 
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