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सड़क हादसों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Tue, 10 Jun 2014 02:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 10 Jun 2014 02:23 PM IST
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Highcourt Major Decision on Road Accidents

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि सड़क दुर्घटना में जानवर की गलती का बहाना कर क्लेम ट्रिब्यूनल मुआवजा देने से मना नहीं कर सकता। जस्टिस के कानन ने कहा कि दुर्घटना के समय गलती मानवीय होती है, उसे जानवर पर डाल कर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।

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दुर्घटना के एक मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने घायलों को मुआवजा देने से मना कर दिया था। उन्हीं याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने उक्त फैसला दिया है।
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एक दिसंबर 2009 को रोपड़ निवासी हरमेश कुमार और ओम प्रकाश थ्री व्हीलर से सफर कर रहे थे। चंडीगढ़ निवासी इंदरजीत सिंह की कार थ्री व्हीलर में जा लगी। कार इंश्योर्ड थी। दुर्घटना की डीडीआर काटी गई, चूंकि दोनों पक्षों में समझौते के आसार थे और वे तत्काल जांच नहीं चाहते थे। एक हफ्ते बाद पुलिस में बयान दर्ज करवाए गए।
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बयान में दोनों पक्षों ने कहा कि ब्रेक लगाने की कोशिश हुई। दोनों वाहनों के आगे जानवर था, उसी के कारण हादसा घटा, इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। ट्रिब्यूनल में इन दोनों को बयान के लिए नहीं बुलाया गया और पुलिस की डीडीआर के आधार पर क्लेम देने से मना कर दिया गया।

हरमेश और ओमप्रकाश ने ट्रिब्ययूनल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस के.कानन ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ितों को न इंश्योरेंस कंपनी और न ही अदालत में बुलाया गया, सिर्फ डीडीआर में दर्ज बयान के आधार पर ट्रिब्यूनल ने फैसला दिया। हाईकोर्ट ने कहा है कि सड़क हादसों में मानवीय गलती ही होती है और इसके लिए जानवर को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता।

दूसरा, मुआवजे के दावे पर विचार करते वक्त क्लेम ट्रिब्यूनल को यह देखना चाहिए था कि भले ही किसी ने बयान दिया हो कि दोनों ड्राइवरों की गलती नहीं है, लेकिन बाद में वह इस बयान के विपरीत दुर्घटना में गलती पर फैसले के लिए अदालत में केस करता है, तब पुलिस में दिए बयान पर ही निर्भर नहीं रहा जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा है कि वैसे भी क्लेम के दावेदार को यह लड़ाई लड़ने का हक है कि ड्राइवरों की गलती थी और वह जानवर को टक्कर मारने से रोक सकते थे और अपने वाहनों को भी बचा सकते थे। कोई ड्राइवर जानवर की गलती बता कर पल्ला नहीं झाड़ सकता। गलती मनुष्य से होती है।


इन तथ्यों के साथ हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का फैसला रद्द करते हुए दोबारा विचार के लिए वापस भेज दिया है। इस दौरान ट्रिब्यूनल को तय करना है कि ड्राइवरों में से गलती किस की थी। प्राथमिकता के आधार पर क्लेम पर फैसला लेने का निर्देश दिया गया है। दावेदारों को भी वहीं बयान दर्ज कराने होंगे।

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