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अर्जुन अवार्डी बॉक्सर ने सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप, हाईकोर्ट में याचिका

Sat, 29 Jul 2017 09:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 29 Jul 2017 09:59 AM IST
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HighCourt issues notice to Haryana Government
बॉक्सर मनोज कुमार - फोटो : फाइल फोटो
कैथल निवासी अर्जुन अवार्डी तथा कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर मनोज कुमार ने हरियाणा सरकार पर खिलाड़ियों को नौकरी देने में भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मनोज ने डीएसपी के तौर पर नियुक्ति दिए जाने की अपील की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। कोर्ट ने पूछा कि राज्य सरकार से पूछा कि देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी हक के लिए अदालतों के चक्कर लगाने को क्यों मजबूर हो रहे हैं। 
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मनोज कुमार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि हरियाणा सरकार ने उसके साथ भेदभाव करते हुए खेल कोटे से डीएसपी के तौर पर नियुक्ति न देते हुए इंस्पेक्टर बनाने की पेशकश की थी। याची ने बताया कि उसने कई मंचों पर अवार्ड व पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उसको अर्जुन अवार्ड मिला है और वह 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल भी जीत चुका है। 
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खिलाड़ियों को नौकरी देने में भेदभाव पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

HighCourt issues notice to Haryana Government
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
याचिकाकर्ता ने कहा कि खेल नीति के तहत उन्हें डीएसपी का पद दिया जाना चाहिए था, क्योंकि वे ग्रेजुएट हैं जबकि उन्हें इंस्पेक्टर का पद ऑफर किया गया। याचिका में बताया गया कि उनसे पूर्व ममता सौदा, जोगिंदर शर्मा, जितेंद्र कुमार, संदीप सिंह, सुरेंद्र कौर, सरदार सिंह, गीता जाखड़ आदि को डीएसपी बनाया गया है।

याची ने कहा कि यदि उनको डीएसपी नहीं बनाया जाता है तो यह उनके साथ अन्याय होगा। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद टिप्पणी करते हुए कहा देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी हक के लिए अदालतों के चक्कर लगाने को मजबूर क्यों हैं और आखिर क्यों खिलाड़ियों को नौकरी देते हुए भेदभाव हो रहा है। बरहवीं पास को डीएसपी तो ग्रेजुएट को इंस्पेक्टर की नौकरी क्यों दी जा रही है। क्या खेल नीति में कोई मानक तय नहीं दिए गए हैं।
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