फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Highcourt grants bail accused woman in corruption case

Highcourt: कोई भी मां से बेहतर अपने बच्चे की सुरक्षा का आकलन नहीं कर सकता, दस साल की बच्ची की मां को दी जमानत

Thu, 03 Oct 2024 08:29 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 03 Oct 2024 08:29 AM IST
सार

हरियाणा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप भ्रष्टाचार मामले में बच्ची का पिता पहले से जेल में था। गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर में मां को भी गिरफ्तार किया गया था और उसे अपनी बेटी को रिश्तेदारों के पास छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

विज्ञापन
Highcourt grants bail accused woman in corruption case
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 10 वर्षीय बच्ची की मां को जमानत देते हुए कहा कि कोई भी मां से बेहतर अपने बच्चे की सुरक्षा और सर्वोत्तम हित का आकलन नहीं कर सकता। 
विज्ञापन


हरियाणा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप भ्रष्टाचार मामले में बच्ची का पिता पहले से जेल में था। गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर में मां को भी गिरफ्तार किया गया था और उसे अपनी बेटी को रिश्तेदारों के पास छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
विज्ञापन


कॉलेज प्रिंसिपल बीना यादव ने तीन याचिकाएं दाखिल कर भ्रष्टाचार के मामले में जमानत की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट का कर्तव्य है कि वह बच्चे के हितों की रक्षा करे और इसे रिश्तेदारों के हाथों में न छोड़े। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मां ने कहा है कि उसे अपने किसी करीबी पर भरोसा नहीं है कि वे उसकी बेटी की सुरक्षा, शिक्षा और भावनात्मक भलाई को सुनिश्चित कर सकते हैं। दस वर्ष की आयु में बच्चा किशोरावस्था में प्रवेश करता है, जो संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक विकास का एक महत्वपूर्ण चरण है। इस अवधि के दौरान बच्चे की मनोवैज्ञानिक और शारीरिक ज़रूरतें काफी बदल जाती हैं, जिसके लिए मार्गदर्शन, भावनात्मक स्थिरता और पोषण की आवश्यकता होती है। इस मोड़ पर मां की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह भावनात्मक समर्थन, सुरक्षा और नैतिक ढांचे की विकसित होती भावना को आकार देने में मदद करती है। 


एक स्थिर वातावरण को बढ़ावा देने के लिए मां की उपस्थिति आवश्यक है। इस चरण की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए, मां की प्रत्यक्ष भागीदारी की अनुपस्थिति बच्चे के को हानिकारक रूप से प्रभावित कर सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्ची की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए याची को जमानत देना उचित है, भले ही मां के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हो। अदालत ने जमानत की याचिका स्वीकार कर ली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed