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Highcourt: छात्र को फेल घोषित करने पर पीयू पर एक लाख का जुर्माना, HC ने कहा-विवि का फैसला अवैध और विकृत
Wed, 09 Oct 2024 03:43 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 09 Oct 2024 03:43 PM IST
सार
चंडीगढ़ निवासी छात्र रोहन राणा ने याचिका दाखिल करते हुए दिसंबर 2023 में घोषित किए गए भूमि कानून और किराया कानून पेपर के परिणाम को चुनौती दी थी। मई 2019 में जब परीक्षा ली गई थी तब वह इस पेपर में फेल हो गया था।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीए एलएलबी के छठे सेमेस्टर के पेपर में छात्र को फेल घोषित करने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) चंडीगढ़ पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने पीयू को आदेश दिया कि यह राशि छात्र को दी जाए और बाद में दोषी अधिकारियों से वसूल की जाए। हाईकोर्ट ने पीयू वीसी को इस मामले पर दो महीने में सुधारात्मक उपाय करने का भी निर्देश दिया।
चंडीगढ़ निवासी छात्र रोहन राणा ने याचिका दाखिल करते हुए दिसंबर 2023 में घोषित किए गए भूमि कानून और किराया कानून पेपर के परिणाम को चुनौती दी थी। मई 2019 में जब परीक्षा ली गई थी तब वह इस पेपर में फेल हो गया था। इसके लिए उसने मई 2023 में दोबारा परीक्षा दी थी। जब छात्र ने 2016-17 के शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लिया था तो 60:40 अंकों का मानदंड लागू था। थ्योरी पेपर के लिए 60 और आंतरिक मूल्यांकन के लिए 40 अंकों का प्रावधान था।
बाद में नियमों में संशोधन किया गया और थ्योरी पेपर और आंतरिक मूल्यांकन का अनुपात 60:40 से बदलकर 80:20 कर दिया गया। एक छात्र को आंतरिक मूल्यांकन और थ्योरी पेपर में संयुक्त रूप से 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता थी। जब छात्र ने मई 2023 में परीक्षा दी तो उसे अधिकतम 80 अंकों वाला पेपर दिया गया। उसने 54 अंक प्राप्त किए और इस तरह वह सफल हो गया लेकिन विश्वविद्यालय ने छात्र के अंकों को 80 में से 54 से घटाकर 60 में से 41 करने की प्रक्रिया अपनाई। इस तरह उसे फेल घोषित कर दिया गया।
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चंडीगढ़ निवासी छात्र रोहन राणा ने याचिका दाखिल करते हुए दिसंबर 2023 में घोषित किए गए भूमि कानून और किराया कानून पेपर के परिणाम को चुनौती दी थी। मई 2019 में जब परीक्षा ली गई थी तब वह इस पेपर में फेल हो गया था। इसके लिए उसने मई 2023 में दोबारा परीक्षा दी थी। जब छात्र ने 2016-17 के शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लिया था तो 60:40 अंकों का मानदंड लागू था। थ्योरी पेपर के लिए 60 और आंतरिक मूल्यांकन के लिए 40 अंकों का प्रावधान था।
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बाद में नियमों में संशोधन किया गया और थ्योरी पेपर और आंतरिक मूल्यांकन का अनुपात 60:40 से बदलकर 80:20 कर दिया गया। एक छात्र को आंतरिक मूल्यांकन और थ्योरी पेपर में संयुक्त रूप से 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता थी। जब छात्र ने मई 2023 में परीक्षा दी तो उसे अधिकतम 80 अंकों वाला पेपर दिया गया। उसने 54 अंक प्राप्त किए और इस तरह वह सफल हो गया लेकिन विश्वविद्यालय ने छात्र के अंकों को 80 में से 54 से घटाकर 60 में से 41 करने की प्रक्रिया अपनाई। इस तरह उसे फेल घोषित कर दिया गया।
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