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Highcourt: बर्खास्त कर्मचारी नहीं कर सकता पेंशन की मांग, पंजाब पुलिस के डिसमिस कर्मी की याचिका खारिज

Wed, 05 Mar 2025 11:14 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 05 Mar 2025 11:14 AM IST
सार

मलूक सिंह सेना में सेवा देने के बाद अक्तूबर 1975 में पंजाब पुलिस में शामिल हुए। अनुशासनात्मक कार्यवाही के बाद उन्हें 29 मई 1999 को बर्खास्त कर दिया गया। उनकी अपील और दया याचिका भी खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी।

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Highcourt Dismissed employee cannot demand pension Punjab Police
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बर्खास्त पंजाब पुलिस अधिकारी की पेंशन लाभ की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सेवा से बर्खास्तगी पंजाब सिविल सेवा नियम के नियम के तहत पेंशन अधिकारों को रद्द करती है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि पेंशन केवल उन लोगों के लिए है जो सेवानिवृत्त हुए हों। बर्खास्त कर्मचारी असाधारण परिस्थितियों में अनुकंपा भत्ता मांग सकता है। 

मलूक सिंह सेना में सेवा देने के बाद अक्तूबर 1975 में पंजाब पुलिस में शामिल हुए। अनुशासनात्मक कार्यवाही के बाद उन्हें 29 मई 1999 को बर्खास्त कर दिया गया। उनकी अपील और दया याचिका भी खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। न्यायालय ने 16 मई 2003 के एक आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया। फिर भी, उनकी 21 साल की लंबी सेवा को देखते हुए, अदालत ने उन्हें पेंशन लाभ के लिए अधिकारियों से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी। हालांकि, उनके दावे को खारिज कर दिया गया।
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परेशान होकर उन्होंने पेंशन लाभ प्रदान करने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल की थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान मलूक सिंह का निधन हो गया और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने मामले को आगे बढ़ाते हुए तर्क दिया कि 21 साल से अधिक सेवा वाले कर्मचारी को केवल उसकी बर्खास्तगी के कारण पेंशन से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। 
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अदालत ने पाया कि मलूक सिंह की बर्खास्तगी अंतिम हो गई है, क्योंकि पिछले मुकदमे में खंडपीठ ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया था। नतीजतन, अदालत के सामने एकमात्र मुद्दा यह था कि क्या बर्खास्त कर्मचारी पेंशन लाभ का दावा कर सकता है।


अदालत ने पंजाब सिविल सेवा नियम के नियम 2.5 की जांच की, जो बर्खास्त कर्मचारियों के लिए पेंशन पर स्पष्ट रूप से रोक लगाता है। इसने नोट किया कि जबकि बर्खास्त कर्मचारी इस नियम के तहत अनुकंपा भत्ता मांग सकता है, इसे केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दिया जा सकता है। अंत में, अदालत ने याचिका दायर करने में सात साल की अस्पष्ट देरी पर ध्यान दिया। अधिकारियों ने 2004 में मलूक सिंह के पेंशन दावे को खारिज कर दिया, फिर भी उन्होंने 2011 में ही उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

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