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Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court woman who marries while first wife still alive entitled to neither status of wife nor widow

हाईकोर्ट का अहम फैसला: पहली पत्नी के जीवित रहते विवाह करने वाली को न तो पत्नी का दर्जा और न विधवा का

Sat, 25 Apr 2026 08:31 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 25 Apr 2026 08:31 AM IST
सार

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दूसरी शादी, यदि पहली शादी के दौरान हुई है, तो वह स्वतः अवैध है। पहली पत्नी की मृत्यु से इस अवैध विवाह को बाद में वैध नहीं बनाया जा सकता।

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High Court woman who marries while first wife still alive entitled to neither status of wife nor widow
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने परिवारिक पेंशन (फैमिली पेंशन) को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सिर्फ वैध (कानूनी रूप से मान्य) पत्नी ही पेंशन की हकदार होती है। अवैध विवाह से किसी महिला को न तो पत्नी का दर्जा मिलता है और न ही विधवा होने के दावे से फैमिली पेंशन का अधिकार।
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महिला ने मृत सेना अधिकारी की दूसरी पत्नी होने का दावा करते हुए फैमिली पेंशन देने की मांग की थी। याची ने कहा था कि उसका विवाह उस समय हुआ था जब अधिकारी की पहली शादी वैध थी और पहली पत्नी जिंदा थी। बाद में पहली पत्नी की मृत्यु हो गई और ऐसे में अब वह अधिकारी की विधवा होने के नाते फैमिली पेंशन की हकदार है। 
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इस पर कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पेंशन का अधिकार मृत कर्मचारी की मृत्यु के समय मौजूद वैध वैवाहिक स्थिति पर निर्भर करता है। बाद की परिस्थितियों से यह अधिकार पैदा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दूसरी शादी, यदि पहली शादी के दौरान हुई है, तो वह स्वतः अवैध है। पहली पत्नी की मृत्यु से इस अवैध विवाह को बाद में वैध नहीं बनाया जा सकता।
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पहली शादी वैध रहते दूसरी शादी कानूनन शून्य होती है। ऐसी शादी से महिला को पत्नी या विधवा का कानूनी दर्जा नहीं मिलता। इन परिस्थितियों में पहली पत्नी की मृत्यु के बाद भी दूसरी शादी को वैध नहीं माना जा सकता, इसलिए पेंशन का अधिकार बाद में भी उत्पन्न नहीं हो सकता।  - जस्टिस संदीप मौदगिल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट 
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