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Chandigarh: भगोड़ों की धरपकड़ न होने पर हाईकोर्ट सख्त, एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर करेंगे प्रयासों की निगरानी
Sat, 27 Jan 2024 02:46 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 27 Jan 2024 02:46 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने तीनों राज्यों की अदालतों को आदेश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि किसी आरोपी को भगोड़ा घोषित करने के बाद उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को रोका न जाए। पुलिस ने एक निश्चित अंतराल के बाद आरोपी की धरपकड़ को लेकर रिपोर्ट ली जाए और उसकी चल व अचल संपत्ति के बारे में जानकारी जुटाने का आदेश दिया जाए।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
वर्षों तक भगोड़ों की धरपकड़ न होने को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। साथ ही पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के डीजीपी को पुलिस के प्रयास की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर कमेटी गठित करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट के सामने अमृतसर का एक मामला पहुंचा था जहां आरोपी 15 साल से भगोड़ा घोषित था। उसके पकड़ने का कोई ठोस प्रयास नहीं हुआ था। यहां तक कि तय प्रक्रिया के तहत उसकी संपत्ति कुर्क करने का भी प्रयास नहीं किया गया था। इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए अब हाईकोर्ट ने अपने आदेश में तीनों डीजीपी को कहा है कि एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर की अध्यक्षता में कमेटी का गठन हो और इस कमेटी को सभी जिलों के एसएसपी/एसपी हर तीन माह में उनके क्षेत्राधिकार के भगोड़ों को पकड़ने के लिए किए गए प्रयासों का ब्योरा भेजेंगे।
पुलिस किसी भी मामले में आरोपी को गिरफ्तार करते हुए पासपोर्ट, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, क्रेडिट कार्ड की फोटो, बिजली का बिल आदि दस्तावेजों में से कोई 2 दस्तावेज अपने पास रखेगी। मजिस्ट्रेट/अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि हाईकोर्ट के जारी आदेश का पुलिस पालन करे और अदालतें भी भगोड़ों को लेकर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रमेश चंद्र गुप्ता मामले में जारी निर्देशों का ध्यान रखें।
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हाईकोर्ट ने तीनों राज्यों की अदालतों को आदेश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि किसी आरोपी को भगोड़ा घोषित करने के बाद उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को रोका न जाए। पुलिस ने एक निश्चित अंतराल के बाद आरोपी की धरपकड़ को लेकर रिपोर्ट ली जाए और उसकी चल व अचल संपत्ति के बारे में जानकारी जुटाने का आदेश दिया जाए। इसके बाद तय प्रक्रिया का पालन करते हुए संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया जाए।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अदालतों को यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि यदि आरोपी विदेश में है तो एंबेसी के माध्यम से उसे भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाए। साथ ही भगोड़ा घोषित करने के लिए शिकायत देने वाले को आरोपी का मोबाइल नंबर व पता शिकायत के साथ अनिवार्य रूप से सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही इस आदेश की प्रति हरियाण, पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपी व सभी अदालतों को भेजने का आदेश दिया है ताकि इन निर्देशों का पालन किया जा सके।
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हाईकोर्ट के सामने अमृतसर का एक मामला पहुंचा था जहां आरोपी 15 साल से भगोड़ा घोषित था। उसके पकड़ने का कोई ठोस प्रयास नहीं हुआ था। यहां तक कि तय प्रक्रिया के तहत उसकी संपत्ति कुर्क करने का भी प्रयास नहीं किया गया था। इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए अब हाईकोर्ट ने अपने आदेश में तीनों डीजीपी को कहा है कि एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर की अध्यक्षता में कमेटी का गठन हो और इस कमेटी को सभी जिलों के एसएसपी/एसपी हर तीन माह में उनके क्षेत्राधिकार के भगोड़ों को पकड़ने के लिए किए गए प्रयासों का ब्योरा भेजेंगे।
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पुलिस किसी भी मामले में आरोपी को गिरफ्तार करते हुए पासपोर्ट, आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, क्रेडिट कार्ड की फोटो, बिजली का बिल आदि दस्तावेजों में से कोई 2 दस्तावेज अपने पास रखेगी। मजिस्ट्रेट/अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि हाईकोर्ट के जारी आदेश का पुलिस पालन करे और अदालतें भी भगोड़ों को लेकर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रमेश चंद्र गुप्ता मामले में जारी निर्देशों का ध्यान रखें।
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हाईकोर्ट ने तीनों राज्यों की अदालतों को आदेश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि किसी आरोपी को भगोड़ा घोषित करने के बाद उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को रोका न जाए। पुलिस ने एक निश्चित अंतराल के बाद आरोपी की धरपकड़ को लेकर रिपोर्ट ली जाए और उसकी चल व अचल संपत्ति के बारे में जानकारी जुटाने का आदेश दिया जाए। इसके बाद तय प्रक्रिया का पालन करते हुए संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया जाए।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अदालतों को यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि यदि आरोपी विदेश में है तो एंबेसी के माध्यम से उसे भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाए। साथ ही भगोड़ा घोषित करने के लिए शिकायत देने वाले को आरोपी का मोबाइल नंबर व पता शिकायत के साथ अनिवार्य रूप से सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही इस आदेश की प्रति हरियाण, पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपी व सभी अदालतों को भेजने का आदेश दिया है ताकि इन निर्देशों का पालन किया जा सके।