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बिजली संकट: हाईकोर्ट ने कहा- यह समझौता नहीं हड़ताली कर्मियों के पैरों पर गिरने जैसा, प्रशासन को जमकर फटकार लगाई
Thu, 24 Feb 2022 10:28 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 24 Feb 2022 10:28 PM IST
सार
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि शहर के अधिकारियों का रवैया ऐसा कि वह खुद को सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर समझने लगे हैं। इस दौरान हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को जमकर फटकार लगाई है।
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पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कर्मचारी नेताओं के साथ समझौता कर उन्हें काम पर लौटने के लिए मनाने का श्रेय लेने के लिए शाम को की गई प्रेस वार्ता गुरुवार को यूटी प्रशासन की फजीहत का कारण बन गई। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों के पैरों में गिरने के बाद क्रेडिट लेने के लिए प्रेस वार्ता की जा रही है। हाईकोर्ट में सुनवाई आरंभ होते ही यूटी प्रशासन की ओर से बताया गया कि बिजली सुचारु की जा चुकी है और कर्मचारी हड़ताल को छोड़कर काम पर लौट चुके हैं।
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इस दौरान कर्मचारियों और यूटी प्रशासन के बीच हुए समझौते के बाद के मिनट्स ऑफ मीटिंग की कॉपी पेश की गई। इन दस्तावेजों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन दोहरा रवैया अपना रहा है। मंगलवार को सौंपे हलफनामे में कहा गया था कि दोषी कर्मचारियों को बर्खास्त किया जाएगा और समझौते में लिखा गया है कि कर्मचारियों के प्रति संवेदना रखते हुए कार्रवाई होगी।
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एक तरफ सुप्रीम कोर्ट तक निजीकरण पर रोक हटा चुका है, वहीं अधिकारी कर्मचारियों को आश्वासन दे रहे हैं कि निजीकरण के खिलाफ लंबित याचिका पर सुनवाई तक टेंडर को फाइनल नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि अधिकारियों को ही सभी निर्णय लेने है तो न्यायालय क्यों है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि निजीकरण को लेकर लंबित याचिका पर भी कोर्ट के बाहर जाकर आपस में समझौता कर लो। हाईकोर्ट ने कहा कि लगता है कि अधिकारी खुद को सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा समझने लगे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि एक तरफ आप कर्मचारियों पर एस्मा लगा रहे हो और दूसरी तरफ जिनके खिलाफ एस्मा लगाया गया उनके साथ समझौता कर रहे हो।
यह समझौता नहीं हड़ताली कर्मियों के पैरों पर गिरने जैसा है। इतना ही नहीं घुटनों पर आने के बाद इस प्रकार प्रेसवार्ता करना हमारी समझ के बाहर है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार को कोर्ट में बुलाना चाहिए लेकिन अभी फिलहाल चंडीगढ़ के डीसी अगली सुनवाई पर कोर्ट में मौजूद रहें और अभी तक उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दें।