{"_id":"63f9e21756cd85eb96020e5d","slug":"high-court-states-punjab-cannot-refuse-to-give-reservation-to-sc-certificate-holders-issued-from-haryana-2023-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का अहम फैसला: हरियाणा से जारी SC प्रमाणपत्र धारक को आरक्षण देने से पंजाब नहीं कर सकता इनकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट का अहम फैसला: हरियाणा से जारी SC प्रमाणपत्र धारक को आरक्षण देने से पंजाब नहीं कर सकता इनकार
Sat, 25 Feb 2023 03:55 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 25 Feb 2023 03:55 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि जो लोग संयुक्त पंजाब में थे और जो हरियाणा के अलग राज्य के तौर पर पुनर्गठन के बाद हरियाणा में रहे उन्हें अनुसूचित जाति के दर्जे से इनकार नहीं किया जा सकता। जिस जाति से याची है वह हरियाणा व पंजाब दोनों में ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखी गई है।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि हरियाणा से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र धारण करने वाले आवेदक को पंजाब में आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता है। हरियाणा के निवासी पंजाब में प्रवासी नहीं माने जा सकते क्योंकि विभाजन से पहले दोनों एक राज्य थे।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि जो लोग संयुक्त पंजाब में थे और जो हरियाणा के अलग राज्य के तौर पर पुनर्गठन के बाद हरियाणा में रहे उन्हें अनुसूचित जाति के दर्जे से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि गौर करने लायक बात यह भी है कि जिस जाति से याची है वह हरियाणा व पंजाब दोनों में ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखी गई है।
विज्ञापन
क्लर्क पद पर पंजाब में आवेदन करते हुए याचिकाकर्ता श्रीश ने आरक्षित श्रेणी में आरक्षण की मांग की थी। पंजाब सरकार ने यह कहते हुए आरक्षण का लाभ देने से इनकार कर दिया कि उसका अनुसूचित जाति प्रमण पत्र हरियाणा सरकार द्वारा जारी किया गया था। याची ने बताया कि उसके पिता पंजाब सरकार में कार्यरत थे और वहीं से सेवानिवृत्त हुए थे। हालांकि वह हरियाणा में बसे हुए थे। कोर्ट ने कहा कि हरियाणा का गठन 1 नवंबर, 1966 को हुआ था। उससे पहले याची के पिता ने अनुसूचित श्रेणी में ही पंजाब में रोजगार प्राप्त किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि याची के प्रति प्रवासन की अवधारणा को इस मामले पर लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि वाल्मीकि समाज के लोगों को दोनों राज्यों में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित किया गया था। ऐसे में याची को इस लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता।
विज्ञापन