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हनीप्रीत पर लगे आरोप संगीन, कैसे दी जा सकती है जमानत: हाईकोर्ट

Thu, 09 May 2019 10:31 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 09 May 2019 10:31 PM IST
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High Court says serious charges on Honeypreet, how can be given bail
हनीप्रीत (फाइल फोटो) - फोटो : self

डेरा सच्चा सौद प्रमुख गुरमीत राम रहीम की करीबी प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत की नियमित जमानत की मांग पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पर संगीन आरोप हैं ऐसे आरोपी को कैसे जमानत दी जा सकती है।

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इस पर हनीप्रीत के वकील ने कहा कि उन्हें पक्ष रखे जाने का अवसर दिया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर 26 अगस्त को सुनवाई कर पक्ष सुनने का निर्णय लिया है।
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हनीप्रीत ने नियमित जमानत की मांग वाली याचिका में कहा है कि 25 अगस्त 2017 को पंचकूला सीबीआई अदालत ने डेरा मुखी गुरमीत सिंह राम रहीम को साध्वी यौन शोषण के मामले में दोषी करार दिया था।
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इसके बाद पंचकूला में हुए दंगों की साजिश रचने का याची पर आरोप लगाया गया जबकि जिस समय दंगे हुए वह डेरा मुखी के साथ थी और उन्ही के साथ वह पंचकूला से सीधे रोहतक की सुनारिया जेल चली गई थी। उसे इन दंगों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। 

High Court says serious charges on Honeypreet, how can be given bail
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

बावजूद इसके उसे इन दंगों की साजिश का आरोपी बना दिया गया। हनीप्रीत ने कहा कि दंगों की साजिश रचे जाने को लेकर 27 अगस्त 2017 को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। तब शिकायत सिर्फ आदित्य इंसा और सुरिंदर धीमान के खिलाफ ही दर्ज की गई थी। इसके बाद 7 सितंबर को डेरा मुखी के गनमैन कांस्टेबल विकास कुमार के बयान दर्ज किए गए जिसमे पहली बार याचिकाकर्ता का नाम आया।

 याची को आरोपी बनाते हुए विकास के बयान के आधार पर कहा गया कि उसने आदित्य इंसा सहित अन्य के साथ 17 अगस्त 2017 को डेरे में बैठक की थी कि अगर 25 अगस्त को सीबीआई कोर्ट डेरा मुखी के खिलाफ कोई भी फैसला सुनाती है तो दंगे करवा इन दंगों की आड़ में डेरा मुखी को वहां से निकालने में मदद की जाए।

याचिकाकर्ता के अनुसार इसके बाद 3 अक्तूबर 2017 को उसने पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया था तभी से वह न्यायिक हिरासत में है। इस मामले में उसे फंसाया गया है और वह पिछले डेढ़ वर्ष से जेल में है। इस केस के 52 गवाह बनाए गए हैं। केस का ट्रायल काफी लम्बा चल सकता है ऐसे में उसे तब तक जेल में न रखा जाये और जमानत दी जाए।

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