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जेबीटी शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 27 Sep 2017 09:17 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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2011 में हरियाणा राज्य में जेबीटी टीचर्स की भर्ती में कैंडीडेट्स द्वारा कथित रूप से धोखाधड़ी किए जाने के मामले में जिनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हुए थे उनके खिलाफ हाईकोर्ट ने विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अंबाला में आते एक गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में जेबीटी टीचर भिवानी निवासी पंकज समेत अन्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने यह आदेश हरियाणा सरकार समेत शिक्षा विभाग को जारी किए हैं।
मामले में हरियाणा सरकार, एलिमेंट्री एजुकेशन के डीजी समेत अन्यों को पार्टी बनाते हुए पिछले महीने यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि याचियों को डिस्ट्रिक्ट एलिमेंट्री एजुकेशन ऑफिसर द्वारा जुलाई महीने में जारी हुई चार्जशीटों को रद्द किया जाए। कहा गया है कि याचियों पर पहले से एफआईआर दर्ज हो रखी है और याचियों को जारी चार्जशीटों में एफआईआर वाले एक जैसे आरोप हैं। इसके अलावा मांग की गई थी कि दायर याचिका के लंबित रहने तक याचियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। याची पक्ष की तरफ से एडवोकेट सुनील कुमार नेहरा ने दलीलें पेश कीं।
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मामले में हरियाणा सरकार, एलिमेंट्री एजुकेशन के डीजी समेत अन्यों को पार्टी बनाते हुए पिछले महीने यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि याचियों को डिस्ट्रिक्ट एलिमेंट्री एजुकेशन ऑफिसर द्वारा जुलाई महीने में जारी हुई चार्जशीटों को रद्द किया जाए। कहा गया है कि याचियों पर पहले से एफआईआर दर्ज हो रखी है और याचियों को जारी चार्जशीटों में एफआईआर वाले एक जैसे आरोप हैं। इसके अलावा मांग की गई थी कि दायर याचिका के लंबित रहने तक याचियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। याची पक्ष की तरफ से एडवोकेट सुनील कुमार नेहरा ने दलीलें पेश कीं।
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याचियों को संबंधित दस्तावेज मुहैया नहीं कराने का आरोप
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
याची वर्ष 2011 में हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन द्वारा जेबीटी टीचर नियुक्त हुए थे। वर्ष 2011 में ही याचियों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। जिसमें आरोप लगाया गया था कि एचटैट परीक्षा में जो कैंडीडेट आए थे वह इंटरव्यू में आए कैंडीडेट्स से अलग थे। जिस पर अगस्त, 2012 में हाईकोर्ट ने डायरेक्टर एलिमेंट्री एजुकेशन को चयन प्रक्रिया की जांच करने को कहा था। इसमें वैज्ञानिक पद्धति अपनाने और जेबीटी लिखित परीक्षा में आए सभी कैंडीडेट्स के दस्तखत और अंगूठे के निशान लेकर उनका आवेदन फार्म में दिए दस्तखतों से मिलान करना था। सरकारी लेबोरेट्री के फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ से इसकी जांच करवाने का आदेश दिया गया था।
2015 में याचियों के खिलाफ विभाग ने जारी किया नोटिस
वर्तमान याचिका के मुताबिक सरकार ने हाईकोर्ट आदेशों के पालन में जल्दबाजी करते हुए याचियों के खिलाफ हाईकोर्ट में रिपोर्ट दे दी। मार्च, 2015 में याचियों को विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा कि उन्हें सेवा से बर्खास्त क्यों न कर दया जाए। मई, 2015 में याची जेबीटी टीचर्स ने नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली। जिस नोटिस को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।
याचियों को संबंधित दस्तावेज मुहैया नहीं कराने का आरोप
वहीं, हाईकोर्ट के एक आदेश के अनुसार कुछ याचियों के खिलाफ सितंबर, 2015 में पानीपत और पलवल में एफआईआर दर्ज की थी। दूसरी ओर याचियों को जुलाई, 2015 में चार्जशीट जारी कर दी गई। याची पक्ष ने चार्जशीट पर अपना विस्तृत जवाब पेश किया था। जिसमें कहा गया कि याचियों को संबंधित दस्तावेज मुहैया नहीं करवाए गए। मई, 2015 के आदेशों में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि याचियों को स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाए। वहीं याचियों के जवाब पर कोई कार्रवाई नहीं की गई
2015 में याचियों के खिलाफ विभाग ने जारी किया नोटिस
वर्तमान याचिका के मुताबिक सरकार ने हाईकोर्ट आदेशों के पालन में जल्दबाजी करते हुए याचियों के खिलाफ हाईकोर्ट में रिपोर्ट दे दी। मार्च, 2015 में याचियों को विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा कि उन्हें सेवा से बर्खास्त क्यों न कर दया जाए। मई, 2015 में याची जेबीटी टीचर्स ने नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली। जिस नोटिस को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।
याचियों को संबंधित दस्तावेज मुहैया नहीं कराने का आरोप
वहीं, हाईकोर्ट के एक आदेश के अनुसार कुछ याचियों के खिलाफ सितंबर, 2015 में पानीपत और पलवल में एफआईआर दर्ज की थी। दूसरी ओर याचियों को जुलाई, 2015 में चार्जशीट जारी कर दी गई। याची पक्ष ने चार्जशीट पर अपना विस्तृत जवाब पेश किया था। जिसमें कहा गया कि याचियों को संबंधित दस्तावेज मुहैया नहीं करवाए गए। मई, 2015 के आदेशों में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि याचियों को स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाए। वहीं याचियों के जवाब पर कोई कार्रवाई नहीं की गई