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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: हरियाणा में गैरमंजूर पदों पर लगे कच्चे कर्मचारियों को 2003 की नीति के तहत करें नियमित
Sat, 06 Apr 2024 08:32 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 06 Apr 2024 08:32 AM IST
सार
याचिका में कहा गया था कि हरियाणा में कच्चे कर्मचारी दो दशक से भी अधिक समय से सेवा दे रहे हैं। ओम प्रकाश चौटाला की सरकार के समय 2003 में इन्हें पक्का करने की नीति आई लेकिन इन्हें पक्का नहीं किया गया।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए हरियाणा में सैकड़ों कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने का रास्ता साफ कर दिया है, जो 2003 में ओमप्रकाश चौटाला सरकार में आई नीति के तहत पक्के होने के योग्य थे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि राज्य किसी व्यक्ति को दो दशक तक उसी पद पर नियुक्त करने का निर्णय लेता है जहां उसकी नियुक्ति हुई थी तो यह नहीं कहा जा सकता कि उसके लिए कोई नियमित कार्य नहीं था।
यमुनानगर निवासी ओम प्रकाश व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए उन्हें नियमित करने की मांग की थी। याचिका में बताया गया कि वे राज्य में दो दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवाओं को 2003 की नीति आने के बावजूद नियमित नहीं किया गया। उनके कई साथियों और कई जूनियरों की सेवाएं नियमित हो गईं, लेकिन याचिकाकर्ताओं को कोई लाभ नहीं मिला। याचिका का विरोध करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति मंजूर पदों पर नहीं हुई थी और आज भी वह मंजूर पदों पर काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उनकी सेवा को नियमित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार ने कच्चे कर्मियों को नियमित करने के लिए नीति जारी की है तो प्रत्येक कर्मचारी पर इसे लागू किया जाना चाहिए। भेद-भाव नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उनके जूनियरों के नियमित होने की तिथि से नियमित करने का आदेश दिया है। नियमित होने की स्थिति में वित्तीय लाभ केवल तब से मिलेंगे जब से उनकी ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
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संविधान में राज्य को कल्याणकारी कहा गया है और ऐसे में यदि कोई कर्मचारी एक दशक से अधिक अपनी सेवा राज्य को देता है तो सरकार का दायित्व बनता है कि उसे नियमित करने के लिए पद सृजित करे। राज्य को उसको नियमित करने का प्रयास करना चाहिए न कि उनकी सेवा को नियमित करने के मार्ग में बाधक। - एचएस सेठी, न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय
हाईकोर्ट के इस फैसले से देर से ही सही, लेकिन सैकड़ों कच्चे कर्मचारियों को न्याय मिला है। अब हम चाहते हैं कि सरकार इस फैसले को लागू करे और जो कच्चे कर्मचारी इस फैसले के दायरे में आने से रह गए हैं और 10 से 15 साल से सरकार को सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें भी जल्द पक्का किया जाए। - सुभाष लांबा, अध्यक्ष अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ
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यमुनानगर निवासी ओम प्रकाश व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए उन्हें नियमित करने की मांग की थी। याचिका में बताया गया कि वे राज्य में दो दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवाओं को 2003 की नीति आने के बावजूद नियमित नहीं किया गया। उनके कई साथियों और कई जूनियरों की सेवाएं नियमित हो गईं, लेकिन याचिकाकर्ताओं को कोई लाभ नहीं मिला। याचिका का विरोध करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति मंजूर पदों पर नहीं हुई थी और आज भी वह मंजूर पदों पर काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उनकी सेवा को नियमित नहीं किया जा सकता।
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार ने कच्चे कर्मियों को नियमित करने के लिए नीति जारी की है तो प्रत्येक कर्मचारी पर इसे लागू किया जाना चाहिए। भेद-भाव नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उनके जूनियरों के नियमित होने की तिथि से नियमित करने का आदेश दिया है। नियमित होने की स्थिति में वित्तीय लाभ केवल तब से मिलेंगे जब से उनकी ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
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संविधान में राज्य को कल्याणकारी कहा गया है और ऐसे में यदि कोई कर्मचारी एक दशक से अधिक अपनी सेवा राज्य को देता है तो सरकार का दायित्व बनता है कि उसे नियमित करने के लिए पद सृजित करे। राज्य को उसको नियमित करने का प्रयास करना चाहिए न कि उनकी सेवा को नियमित करने के मार्ग में बाधक। - एचएस सेठी, न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय
हाईकोर्ट के इस फैसले से देर से ही सही, लेकिन सैकड़ों कच्चे कर्मचारियों को न्याय मिला है। अब हम चाहते हैं कि सरकार इस फैसले को लागू करे और जो कच्चे कर्मचारी इस फैसले के दायरे में आने से रह गए हैं और 10 से 15 साल से सरकार को सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें भी जल्द पक्का किया जाए। - सुभाष लांबा, अध्यक्ष अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ