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Haryana: 20 साल की सेवा के बावजूद नियमित हुए बिना मर जाते हैं कर्मचारी, हाईकोर्ट ने दिया नीति बनाने का आदेश

Thu, 30 Nov 2023 08:21 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 30 Nov 2023 08:21 AM IST
सार

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि सरकार की रेगुलराइजेशन नीति के तहत वे नियमित होने के लिए पात्र थीं लेकिन स्वीकृत पद न होने के चलते उन्हें नियमित नहीं किया गया और आज भी वे अनुबंध के आधार पर ही काम कर रही हैं।

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High Court order Haryana Govt to formulate policy for workers not regularized under regularization policy
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

तकनीकी कारणों व पदों की कमी के चलते सरकार की रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत नियमित नहीं हो पाने वाले कर्मियों के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नीति बनाने का आदेश दिया है। 

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हाईकोर्ट ने कहा कि 20 वर्षों की सेवा के बाद भी कर्मचारी नियमित होने के इंतजार में मर जाते हैं जो ठीक नहीं है। हाईकोर्ट में हरियाणा में कढ़ाई व सुई कार्य प्रशिक्षक महिलाओं की ओर से याचिका दाखिल करते हुए नियमित करने का निर्देश जारी करने की अपील की गई थी। 
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याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि सरकार की रेगुलराइजेशन नीति के तहत वे नियमित होने के लिए पात्र थीं लेकिन स्वीकृत पद न होने के चलते उन्हें नियमित नहीं किया गया और आज भी वे अनुबंध के आधार पर ही काम कर रही हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में हरियाणा के एडवोकेट जनरल को बुलाया गया। 
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हाईकोर्ट ने उन्हें कहा कि संविदा कर्मचारी अपने जीवन के 20 साल देने के बाद नियमित होने के इंतजार में मर जाते हैं लेकिन पदों की कमी के कारण उन्हें नियमित नहीं किया जाता है। ऐसे में सरकार का यह दायित्व है कि जो कर्मचारी सरकार के अनुसार नियमित होने के लिए पात्र हैं उनके लिए नीति तैयार की जाए।

कोर्ट में नीति के बारे में सरकार द्वारा लिखा पत्र किया गया पेश
सरकार की ओर से राज्य में लम्बे समय तक सेवा प्रदान करने वाले कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए एक कैडर बनाने की योजना पेश की गई। कोर्ट के समक्ष राज्य की नीति के बारे में 23 नवंबर को सरकार द्वारा लिखा गया पत्र पेश किया गया। इसके अनुसार जहां भी प्रशासनिक विभाग/बोर्ड/निगम/स्वायत्त इकाइयां नियमितीकरण नीतियों के तहत व्यक्तियों को नियमित कर रही हैं, प्रशासनिक विभाग, वित्त विभाग की मंजूरी के साथ, ऐसे कर्मचारियों को समायोजित करने के लिए कुछ पद सृजित करने की उन्हें अनुमति दी गई है। 


नीति में आगे कहा गया कि वित्त विभाग को सलाह दी गई है कि जब भी कोई विभाग/बोर्ड/निगम/स्वायत्त इकाई नियमितीकरण नीतियों के तहत नियमित होने के लिए प्रस्तावित किसी भी कर्मचारी के लिए पद बनाने के लिए मामला प्रस्तुत करता है तो पदों के निर्माण के लिए सहमति दें। हालांकि, नियमित वेतनमान के बकाया का भुगतान वास्तविक नियमितीकरण आदेश की तारीख से 38 महीने पहले तक सीमित किया जा सकता है और अन्य कर्मचारियों को लाभ दिया जा सकता है। बुधवार को न्यायालय ने सभी तथ्यों को देखने के बाद सरकार को उचित नियमित करने की नीति बनाने का आदेश दिया।

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