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Highcourt: शराब के नशे में पकड़े पुलिसकर्मी पर कोई रहम नहीं, वर्दीधारी लोगों में अनुशासन सर्वोपरि
Sat, 20 Sep 2025 01:23 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 20 Sep 2025 01:23 PM IST
सार
चंडीगढ़ प्रशासन के वकील ने अदालत को बताया कि कांस्टेबल शराब के नशे में होटल मालिक और एक ग्राहक से अभद्र व्यवहार कर रहा था। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके नशे में होने की पुष्टि हुई थी।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पाए गए पुलिसकर्मी पर कोई रहम नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि वर्दीधारी लोगों में अनुशासन सर्वोपरि है। ऐसा आचरण गंभीर दुराचार की श्रेणी में आता है। यह न केवल असंगत है बल्कि सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा है।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने सात साल पुराने मामले में यह फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित कांस्टेबल पर दो वेतन वृद्धियों की रोक की सजा न तो कठोर है और न ही अनुपातहीन। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पुलिसकर्मी है, जिसकी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, उस पर आरोप साबित होने के बाद दी गई सजा को अनुचित नहीं ठहराया जा सकता।
साल 2018 में दायर याचिका में कांस्टेबल ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) चंडीगढ़ की ओर से चार अक्तूबर 2017 को दिए गए आदेश को चुनौती दी थी। कैट ने उसकी सजा संबंधी अपील खारिज कर दी थी। चंडीगढ़ प्रशासन के वकील ने अदालत को बताया कि कांस्टेबल शराब के नशे में होटल मालिक और एक ग्राहक से अभद्र व्यवहार कर रहा था। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके नशे में होने की पुष्टि हुई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी थी कि उसे जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करवाई गई थी।
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जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने सात साल पुराने मामले में यह फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित कांस्टेबल पर दो वेतन वृद्धियों की रोक की सजा न तो कठोर है और न ही अनुपातहीन। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पुलिसकर्मी है, जिसकी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, उस पर आरोप साबित होने के बाद दी गई सजा को अनुचित नहीं ठहराया जा सकता।
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साल 2018 में दायर याचिका में कांस्टेबल ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) चंडीगढ़ की ओर से चार अक्तूबर 2017 को दिए गए आदेश को चुनौती दी थी। कैट ने उसकी सजा संबंधी अपील खारिज कर दी थी। चंडीगढ़ प्रशासन के वकील ने अदालत को बताया कि कांस्टेबल शराब के नशे में होटल मालिक और एक ग्राहक से अभद्र व्यवहार कर रहा था। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके नशे में होने की पुष्टि हुई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी थी कि उसे जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करवाई गई थी।
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