फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court News, High Court News

शव का कोई हिस्सा नहीं था जिस पर जख्म नहीं, यह बर्बरता नहीं तो क्या : हाईकोर्ट

Tue, 05 Mar 2024 12:47 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2024 12:47 AM IST
विज्ञापन
High Court News, High Court News
-समयपूर्व रिहाई की मांग को लेकर रोहतक निवासी राजेश की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
विज्ञापन


-22 साल पहले जज ने लिखा था कि हत्या अति क्रूरतापूर्वक हुई, कोई समझदार व्यक्ति हस्तक्षेप कर मौत को आमंत्रित नहीं करेगा

-यूनिवर्सिटी में दिन दहाड़े पीछा करने के बाद की गई थी हत्या, पूरा शरीर जख्मों से था भरा

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे राजेश उर्फ राजे को समय पूर्व रिहाई देने की मांग को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने हत्या करते हुए शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं छोड़ा था जिस पर घाव मौजूद न हो, यह बर्बरता नहीं तो और क्या है। याची ने दलील दी थी कि हत्या में बर्बरता नहीं थी ऐसे में उसे समय पूर्व रिहाई दी जाए। याचिका दाखिल करते हुए राजेश ने बताया कि 1998 में हुई हत्या के मामले में 2002 में उम्रकैद की सजा दी गई थी। याची ने कहा कि वह 15 साल की असल व छूट के साथ लगभग 18 साल की सजा काट चुका है और ऐसे में उसे समयपूर्व रिहाई दी जाए। उसको बर्बरता से हत्या का दोषी बताया जा रहा है जबकि तय मानकों के तहत वह इसका दोषी नहीं है। बर्बरता के मामले में शव को टुकड़े-टुकड़े करना या उसे जलाना आते हैं जबकि याची ने ऐसा नहीं किया था। सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची को जब पहली और दूसरी बार पैरोल मिली तो दोनों बार वह भाग गया था और सरेंडर नहीं किया था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि बर्बरता को लेकर दर्ज केवल उपरोक्त मानक नहीं हैं बल्कि यह हर केस के तथ्यों पर निर्भर करती है। याची ने रोहतक यूनिवर्सिटी में बड़ी दूर तक व्यक्ति का पीछा किया और फिर दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी। दहशत का माहौल ऐसा था कि किसी ने भी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। मेडिकल रिपोर्ट से साफ है कि मृतक के शरीर पर ऐसा कोई हिस्सा नहीं था जिसमें घाव न हो। ऐसे में यह निश्चित रूप से बर्बर तरीके से हत्या का मामला था। 22 साल पहले ट्रायल कोर्ट के जज ने अपने आदेश में यह तक लिखा था कि अति क्रूरतापूर्वक हुई, कोई समझदार व्यक्ति हस्तक्षेप कर मौत को आमंत्रित नहीं करेगा। ऐसे में याची किसी भी प्रकार के रहम का हकदार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed