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Haryana: नायब सैनी को सीएम बनाने पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, केंद्र-विस अध्यक्ष समेत चुनाव आयोग से मांगा जवाब

Mon, 18 Mar 2024 03:52 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 18 Mar 2024 03:52 PM IST
सार

भाजपा की मनोहर लाल सरकार ने कुछ दिन पहले जजपा के साथ गठबंधन तोड़ इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद नायब सिंह सैनी को नया सीएम बनाया गया था। सैनी कुरुक्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने विधानसभा में बहुमत भी हासिल कर लिया है।

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High Court issued notice on petition challenging appointment of Naib Saini as haryana CM
नायब सिंह सैनी ने ली सीएम पद की शपथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के तौर पर कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सिंह सैनी की बनाने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री बनने को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस संधावालिया ने हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष व मुख्य चुनाव आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
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अधिवक्ता जगमोहन सिंह भट्टी ने याचिका में आरोप लगाया है कि नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री नियमों के खिलाफ जाकर बनाया गया है। हर शरण वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश व अन्य मामले का हवाला देते हुए याची ने कहा कि राज्यपाल अनुच्छेद 164 के तहत राज्य की विधानसभा के बाहर के किसी व्यक्ति को मंत्री पद पर नियुक्त नहीं कर सकते। नायब सैनी अभी सांसद हैं और ऐसे में वह हरियाणा विधानसभा का हिस्सा नहीं हैं। इसके अतिरिक्त यह भी कहा कि हरियाणा विधानसभा में 90 सीट हैं और नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाते ही सीटें बढ़कर 91 हो गईं, क्योंकि तब तक मनोहर लाल ने करनाल विधानसभा से इस्तीफा नहीं दिया था और बतौर विधायक वे सदन में मौजूद थे। सैनी को मुख्यमंत्री बनाने में संवैधानिक नियमों की अवहेलना की गई है।
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सोमवार को जैसे ही सुनवाई शुरू हुई हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन ने हाई कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री बनने के लिए विधानसभा का सदस्य होना जरूरी नहीं है। एचडी देवगौड़ा विधायक रहते हुए देश के प्रधानमंत्री बने थे। संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को मुख्यमंत्री या मंत्री बनाया जा सकता है, भले ही वह विधानसभा का सदस्य हो या न हो। आवश्यक स्थिति यह होती है कि जिसे मुख्यमंत्री या मंत्री बनाया गया है उसे छह माह के भीतर चुनाव जीतना आवश्यक होता है। एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि मनोहर लाल ने न केवल मुख्यमंत्री पद से बल्कि विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित विधानसभा में 90 सदस्य ही हैं। साथ ही यह भी बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस्तीफे के बाद ही उप चुनाव की घोषणा की जा चुकी है।
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इन सवालों पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
1. मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा 12 मार्च को दे दिया था, लेकिन विधानसभा सदस्य के तौर पर इस्तीफा अगले दिन यानी 13 मार्च को दिया। ऐसे में सैनी के शपथ ग्रहण के दौरान वह विधानसभा के 91वें सदस्य थे।
विधानसभा स्पीकर : नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री के तौर पर विधानसभा में मौजूद थे। अभी वह विधानसभा के सदस्य नहीं हैं। उनके पास छह महीने का समय है। फिर भी इस बारे में अपने वैधानिक अधिकारियों से बात करने के बाद कुछ स्पष्ट कर पाऊंगा।
2. मुख्यमंत्री नियुक्त होने के बाद नायब सिंह सैनी को छह माह में चुनाव जीतना होगा, लेकिन यदि विधानसभा को एक वर्ष से कम अवधि बची हो तो उपचुनाव नहीं करवाए जा सकते।
विधानसभा स्पीकर : इस बारे में मुझे स्पष्ट जानकारी नहीं है। मगर जो मेरी जानकारी है, उसके मुताबिक जब छह महीने से ज्यादा अवधि हो तो उपचुनाव करवाए जा सकते हैं।
3. कोई व्यक्ति क्या एक साथ दो सदनों का हिस्सा रह सकता है। नायब सैनी कुरुक्षेत्र से सांसद हैं और क्या वह सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री का पद संभाल सकते हैं।
विधानसभा स्पीकर : जी, वह बिल्कुल मुख्यमंत्री का पद संभाल सकते हैं। ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं। बिना सदस्य रहे भी वह छह महीने तक मुख्यमंत्री का पद संभाल सकते हैं।

जनता के चुने प्रतिनिधियों को सदन में रखते हुए सभी मंत्रालय ऐसे ही बांट देंगे
कोई भी व्यक्ति मंत्री या मुख्यमंत्री नियुक्त किया जा सकता है, हरियाणा सरकार की इस दलील पर हाईकोर्ट ने कहा कि क्या इस प्रकार आप जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को सदन में रखते हुए सभी अहम मंत्रालय ऐसे ही बांट देने की बात कह रहे हैं। क्या बिना चुनाव लड़े नायब सिंह सैनी छह माह तक प्रदेश के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। - जीएस संधावालिया, न्यायाधीश पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

1986 में ऐसे ही मुख्यमंत्री बने थे बंसीलाल

अधिवक्ता हेमंत कुमार ने बताया कि अगर विधानसभा के कार्यकाल के अंतिम वर्ष की अवधि में नायब सैनी की तरह किसी गैर-विधायक को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो खाली हुई विधानसभा सीट पर चुनाव आयोग उपचुनाव करवा सकता है। भले ही उस सीट की अवधि एक साल से कम बची हुई हो। उन्होंने बताया कि 1986 में भी ऐसा हुआ था जब हरियाणा में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल को बदलकर लोकसभा सांसद बंसीलाल को मुख्यमंत्री बनाया गया। तत्कालीन हरियाणा विधानसभा का एक वर्ष से कम समय शेष होने बावजूद भिवानी की तोशाम विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया, जिसमें बंसीलाल रिकॉर्ड मतों से जीते थे। उस उपचुनाव को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, मगर दोनों शीर्ष अदालतों ने उसमें हस्तक्षेप नहीं किया था।
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